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शिकायत पर एफआईआर हो या इसे सिविल मामले की तरह सुने, तय करने का मजिस्ट्रेट को अधिकार

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चंडीगढ़। भूमि को बेचने में हुए फर्जीवाड़े की शिकायत को एफआईआर के लिए न भेजने के फरीदाबाद मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट का अधिकार है कि वह तय करे कि मामले को एफआईआर के लिए भेजना है या सिविल मामले के तौर पर सुनवाई की जाए।
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याचिका दाखिल करते हुए फरीदाबाद निवासी दीपक गुप्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके पास 4 कनाल 6 मरला भूमि मौजूद थी। 2014 में उसने मूल चंद के माध्यम से 1 कनाल जमीन बेच दी थी। कुछ समय बाद याची को पता चला कि किसी ने उस एक कनाल जमीन के साथ-साथ याची की 3 कनाल 6 मरला जमीन भी बेच दी। याची ने सीएम विंडो पर शिकायत दी और शिकायत पुलिस को भेज दी गई। पुलिस ने जांच पूरी कर एफआईआर की सिफारिश के साथ रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को सौंप दी।
याची ने बताया कि मजिस्ट्रेट ने एफआईआर से इनकार करते हुए याची को बयान दर्ज करवाने का आदेश दे दिया। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द किया जाए और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश जारी किया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है कि वह तय करे कि किस मामले को एफआईआर के लिए भेजना है और किस मामले की सिविल मामले के तौर पर सुनवाई करनी है। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही याचिका को खारिज कर दिया।
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