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खुलासाः अफसरों की शह पर हरियाणा-पंजाब के बीच हुई शराब तस्करी, जांच समिति ने की सिफारिशें

Fri, 07 Aug 2020 02:53 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
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कोरोना लॉकडाउन में हरियाणा और पंजाब के बीच शराब की तस्करी अफसरों की शह पर हुई। शराब घोटाले की तह तक जाने के लिए गठित विशेष जांच दल ने रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है।
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एसईटी ने आबकारी एवं कराधान व पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

रिपोर्ट अनुसार अगर दोनों विभाग पूरी ईमानदारी के साथ अपना काम करते तो यह घोटाला होता ही नहीं। दोनों विभागों के अधिकारियों के शराब माफिया के साथ गठजोड़ के कारण ही तस्करी का नेक्सस फलाफूला। 2011-12 के बाद आबकारी विभाग ने अपनी हिदायतें हो लागू नहीं की। सिस्टम की कमियों व अफसरों की लापरवाही से शराब तस्करी को बढ़ावा मिला।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में 12 अहम सिफारिशें की हैं। जिनमें शराब तस्करी व अवैध शराब बरामदगी के केसों को दो महीने के भीतर सुलझाने और केसों का निपटारा कर 31 दिसंबर 2020 तक तस्करी में पकड़ी गई सारी अवैध शराब को नष्ट करने की बात भी शामिल है।
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विशेष जांच समिति ने ये की सिफारिशें

. ट्रैकिंग एंड ट्रेसिंग प्रणाली लागू की जाए। दूसरे राज्यों की शराब हरियाणा में अवैध रूप से अनलोड न हो। इससे राजस्व नुकसान होता है।
. शराब डिस्टलरी व गोदाम पर सीसीटीवी अनिवार्य किए जाएं। मानक संचालन प्रक्त्रिस्या बनाएं। सीसीटीवी कैमरे न लगाने वालों पर कार्रवाई हो।
. हाई ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक टेम्पर फ्लो मीटर सभी डिस्टलरी के टैंक के नल पर लगाए जाएं
. शराब ले जाने वाले वाहनों पर जीपीएस लगाया जाए
. आबकारी एवं कराधान विभाग वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से अपने कानूनों में बदलाव करे
. जिन भी शराब कारखानों से तस्करी का अंदेशा हो वहां आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम पेशेवरों के साथ ऑडिट करे
. शराब कारखानों व डिस्टलरी से सीसीटीवी, फ्लो मीटर रिपोर्ट समयबद्ध लें
. कानूनों में बदलाव कर आबकारी अधिकारियों को शराब तस्करी रोकने का प्रशिक्षण दिया जाए
. नए साल से पहले आबकारी विभाग के पास सीज की गई शराब नहीं बचनी चाहिए
. अवैध शराब की 100 पेटी से ऊपर पकड़े जाने पर पुलिस व आबकारी अधिकारी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट से विभाग के उच्च अधिकारी को तुरंत अवगत कराएं
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