पंजाब में कर्फ्यू-लॉकडाउन में ढील के दौरान शराब के ठेके खोलने की तैयारी कर रही राज्य सरकार को झटका लगा है। राज्य में शराब ठेकेदारों के सिंडिकेट ने सरकार को हर महीने दी जाने वाली फीस को मुद्दा बनाकर ठेके खोलने से इनकार कर दिया है। सिंडिकेट से सदस्यों ने इस विषय पर आज बैठक भी बुलाई, जिसके आधार पर राज्य सरकार को मांग-पत्र सौंपा जाएगा।
सिंडिकेट के पदाधिकारियों ने बातचीत में बताया कि मौजूदा हालात में राज्य में शराब ठेके खोलने में सबसे बड़ी अड़चन ठेकों से हर महीने राज्य सरकार को दी जाने वाली एकमुश्त फीस की है। उन्होंने बताया कि राज्य में शराब का कारोबार करीब 6000 करोड़ का है और उसी हिसाब से सरकार को लाइसेंस फीस आदि अदायगियां की जाती हैं। उन्होंने बताया कि आम दिनों में 14 घंटे ठेके खोले जाते हैं लेकिन अब कर्फ्यू में ढील के दौरान राज्य सरकार केवल 4 घंटे के लिए ठेके खोलने की अनुमति देने का मन बना रही है जबकि मासिक फीस को लेकर कोई बात नहीं कर रही।
सिंडिकेट का कहना है कि जब शराब के ठेके पूरे समय के लिए नहीं खुलेंगे तो उनकी फीस भी चार घंटे के हिसाब से तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्फ्यू-लॉकडाउन के कारण शराब ठेकेदार काफी समय से खाली बैठे हैं और इस अवधि में रेंट, कर्मचारियों के वेतन, अन्य खर्च, टैक्स आदि जस से तस लागू हैं। राज्य में शराब की बिक्री को लेकर सिंडिकेट के एक सदस्य ने बताया कि आम तौर पर हर साल दिसंबर, जनवरी, फरवरी में राज्य में देसी शराब की बिक्री बहुत ज्यादा होती है।
लेकिन इस बार लॉकडाउन और अब प्रवासी मजदूरों की राज्य से वापसी के कारण शराब ठेकेदारों की बिक्री में भारी कमी आई है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शराब का ग्राहक सीमित संख्या में है और इसकी बिक्री भी देसी शराब के मुकाबले कम रहती है। इस बीच, पंजाब सरकार ने सोमवार को राज्य के विभिन्न जिलों में शराब के ठेकों में मौजूद स्टाक का सर्वे आरंभ कर दिया। इसके लिए अधिकारियों को जिलेवार जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और यह अधिकारी कल तक अपनी रिपोर्ट एक्साइज विभाग को सौंप देंगे।
दूसरी ओर, एक्साइज विभाग ने भी मंगलवार को एक बैठक बुलाई है, जिसमें कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए राज्य में शराब के ठेके खोलने की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, एक्साइज विभाग द्वारा तैयार की जाने वाली रूपरेखा में बुधवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया जाएगा और उसके साथ ही सरकार ठेके खोलने की समयसारिणी और तिथि का ऐलान कर सकती है।