संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-5 के दशहरा ग्राउंड में माता मनसा देवी सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन हजारों लोग कथा श्रवण करने पहुंचे। कथावाचक आध्यात्मिक प्रवक्ता जया किशोरी ने कहा कि हमें जीवन जीने का नजरिया बदलना होगा तभी हम सुखी जीवन जी सकते हैं। जिस प्रकार भगवान श्रीराम को राज्याभिषेक मिलते-मिलते अचानक वनवास मिल गया, लेकिन वह दुखी नहीं हुए और वनवास काटने चले गए। उनको यह था कि देखो वन में तो रहना ही है या तो रो कर रह लो या फिर यह सोचो कि वहां जाकर राज करेंगे। नजरिया बदलते ही जीवन सुखी हो जाएगा।
अच्छे को हमेशा ऐसा लगता है सब अच्छे हैं। बुरे को हमेशा लगता है सब बुरे हैं। हमें अपने कर्मों में जीना चाहिए। दूसरे तो भगवान से भी दुखी है उनको नहीं छोड़ रहे। कथावाचन से पहले ट्रस्ट के चेयरमैन संदीप गुप्ता, प्रधान सचिन गोयल, महासचिव रमन सिंगला सहित अन्य पदाधिकारियों ने दूसरे दिन भी विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर चेयरमैन संदीप गुप्ता, प्रधान सचिन गोयल, महासचिव रमन सिंगला, वाइस चेयरमैन हरीश गर्ग, वरिष्ठ उपप्रधान विवेक गुप्ता, उपप्रधान योगेश मित्तल, संयुक्त सचिव तरुण गर्ग, कानूनी सलाहकार संदीप गोयल, सचिव राजीव गुप्ता, वित्त सचिव अजय बंसल, मीडिया सलाहकार कुलदीप गुप्ता, ट्रस्टी आशीष मित्तल, अजय गर्ग, आशीष गुप्ता, विशाल केडिया सहित अन्य उपस्थित रहे।
जीवन में श्रवण, चिंतन और मनन का बताया महत्व
जया किशोरी ने कहा कि कथा सुनने से केवल कल्याण नहीं होता इसे हमें अपने जीवन में भी उतरना होगा। तीन शब्द अपनाने होंगे, श्रवण, चिंतन और मनन। श्रवण यानी सुनो, जितना हो सके सुनो। ज्यादा सुनो, कम बोलो, लेकिन हम क्या कर रहे हैं ज्यादा बोलते हैं और सुनते कम है। बोलोगे तो वही जो पता है, लेकिन सुनने से नई बात पता चलेगी। ज्ञानी को सुनने से पता चलेगा क्या करना चाहिए और मूर्ख को सुनने से पता चलेगा कि क्या नहीं करना चाहिए।
दूसरा चिंतन घर जाकर चिंतन करो कि किसी की भी बात पर आंख बंद करके भरोसा मत कीजिए। अपनी रिसर्च खुद करें। सनातन धर्म कभी भी आपको आंख बंद भरोसा करना नहीं सिखाता। सनातन धर्म प्रश्न करना सीखना है, जिज्ञासा होनी चाहिए। हम अकेले हैं जो अपने शास्त्र नहीं पढ़ते, लेकिन बाकी सब पढ़ते हैं और बचपन से पढ़ते हैं। जबकि सबसे ज्यादा शास्त्र हमारे पास हैं, लेकिन हम एक नहीं पढ़ रहे हैं। हम अपने शास्त्र पढ़ेंगे तो हमें अपने जीवन के सारे उत्तर मिल जाएंगे।
तीसरा है मनन। श्रवण कर लिया, चिंतन कर लिया, अब इसे अपने जीवन में उतारो। सुन लिया, समझ लिया, तो उसे अपने जीवन में उतरना भी तो पड़ेगा। जब भी आप श्रीमद् भागवत कथा सुनने आएं, तो जीवन में केवल एक बदलाव लाने की सोचें। हमारी आदत है कि हम एक साथ कई बदलाव करने की कोशिश करने लग जाते हैं। जब नया साल आता है तो एक नाटक शुरू हो जाता है कि हम जीवन में बदलाव लाएंगे। एक हफ्ता यह नाटक चलता है, लेकिन उसके बाद सब भूल जाते हैं उसके बाद कुछ नहीं करते।