चंडीगढ़। सरकारी जमीन पर भू-माफिया के कब्जों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कालका और पिंजौर नगर परिषद को प्रतिवादी बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका दाखिल करते हुए स्थानीय निवासी नारायण स्वरूप शर्मा ने कहा कि पिंजौर में सरकारी जमीनों पर कब्जों के चलते लोगों को परेशानी हो रही है। राज्य सरकार और प्रशासन इन कब्जों के बारे में जानकारी होने के बावजूद इनको नहीं हटवा रहे हैं। इन्हें हटाने के लिए निर्देश जारी करने की हाईकोर्ट से याचिका में अपील की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने के लिए उन्होंने अपने स्तर पर कई बार मांगपत्र सौंपे लेकिन किसी भी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। याची ने आरटीआई के जरिये पूछा था कि नगर परिषद (तब कालका पिंजौर नगर परिषद का हिस्सा था) के अधीन कुल कितनी जमीन आती है और कितनी पर कब्जे हैं।
साथ ही यह भी पूछा गया था कि इन कब्जों को हटाने के लिए क्या कार्रवाई की गई। मामले में इसकी जानकारी देने से पहले इन्कार कर दिया गया था परंतु अपील करने पर बताया गया कि पिंजौर में कुल 628 बीघा 17 बिसवा सरकारी जमीन है। हालांकि यह बात नहीं बताई गई कि कितनी जमीन कब्जा धारकों ने हड़पी है। याची ने कहा कि हर स्तर पर प्रयास के बावजूद कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष को सुनने के बाद सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। अब कालका और पिंजौर नगर परिषद हैं ऐसे में इन्हें प्रतिवादी बनाया गया और हाईकोर्ट ने इन्हें नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।