पंचकूला। सेक्टर-5 स्थित दशहरा ग्राउंड में लगे खादी ग्रामोद्योग मेले में खादी के प्रति युवाओं का बढ़ता उत्साह साफ नजर आ रहा है। आधुनिक डिजाइन, नैचुरल रंग और इको-फ्रेंडली उत्पादों ने खादी को फैशन की मुख्यधारा में ला खड़ा किया है।
मेले में पहुंचे युवाओं का कहना है कि खादी अब एक स्मार्ट और कॉन्शस चॉइस बन चुकी है, जिसे पहनना अब पुराना नहीं बल्कि ट्रेंड बन गया है। कॉलेज छात्र और नौकरीपेशा युवा खादी के उत्पादों में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। स्टार्टअप संस्कृति ने इस बदलाव को और तेज किया है, जहां युवा उद्यमी खादी और हस्तशिल्प को नए डिजाइनों और डिजिटल प्लेटफार्मों से जोड़ रहे हैं। खादी स्टॉल पर कॉलेज छात्रों और नौकरीपेशा युवाओं की बड़ी संख्या देखने को मिल रही है। सुखदीप, राजबीर, मनीष और संतोष जैसे युवाओं ने बताया कि वे लंबे समय से खादी पहनते आ रहे हैं और अब इसे फैशन का हिस्सा मानते हैं।
युवा उद्यमियों का योगदान
मेले में पहुंचे कुछ युवा उद्यमियों ने बताया कि उन्होंने खादी को नए डिजाइनों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा है, जिससे इसकी डिमांड बढ़ी है। सुषमा ने बताया कि उनके स्टॉल पर महिलाओं के लिए विभिन्न वेरायटी उपलब्ध हैं, और ग्राहकों की डिमांड भी बढ़ी है। वहीं, यादविंदर ने बताया कि वह 15 साल से इस कारोबार में हैं और युवाओं के बीच खादी की काफी डिमांड है।
खादी की मांग पारंपरिक उत्पादों से कहीं अधिक
पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता भी युवाओं को खादी से जोड़ रही है। इस बार मेले में खादी जैकेट, बैग और कुर्तों की मांग पारंपरिक उत्पादों से कहीं अधिक है। फैशन की दुनिया में खादी अब सिर्फ परंपरा नहीं रही, बल्कि ट्रेंड बन चुकी है। स्टार्टअप संस्कृति और सोशल मीडिया ने खादी को नया प्लेटफॉर्म दिया है, जिससे यह कॉलेज छात्रों और नौकरीपेशा युवाओं की पसंद बन रही है। पर्यावरण के प्रति जागरूक युवा वर्ग इको-फ्रेंडली और स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर खादी को जिम्मेदार फैशन बना रहे हैं।