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Highcourt: मौत के सात साल बाद सिपाही को बहाल करने के आदेश, हाईकोर्ट ने कहा-परिवार को दिए जाएं सभी सेवा लाभ

Mon, 04 Sep 2023 10:44 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही आपराधिक मामले में बरी कर्मचारी अधिकार के तौर पर सेवा बहाल करने का दावा नहीं कर सकता लेकिन आपराधिक मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर करना जरूरी है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के इशारे पर याची के पिता को फंसाने की बात हाईकोर्ट 2010 के आदेश में कह चुका है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
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विस्तार
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पंजाब पुलिस के एक जवान को मौत के 7 साल बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बहाल कर उसके परिवार को सभी सेवा लाभ जारी करने का आदेश दिया है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के इशारे पर याची के पिता को झूठे मामले में फंसाने को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया है।

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याचिका दाखिल करते हुए ललित कुमार ने एडवोकेट धीरज चावला के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया था कि उसके पिता पंजाब पुलिस में कार्यरत थे। इस दौरान उन्हें हिरासत में लिए गए दो तस्करों के साथ एस्कॉर्ट ड्यूटी पर लगाया गया था। अक्तूबर 2005 में उन तस्करों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा था और याची के पिता पर उनकी मदद का आरोप था। इसी आधार पर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। याची के पिता को अमृतसर ट्रायल कोर्ट ने दोषी मान 10 साल की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उनकी अपील को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। 

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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मोहाली की एक कोठी के मामले में सिपाही को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने फंसाया था। इस आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में खारिज कर दिया था।

 2016 में याची के पिता की मौत हो गई थी। 2019 में याची की मां ने अपने पति को सेवा में बहाल करने और सेवा लाभ जारी करने के लिए डीजीपी से गुहार लगाई थी लेकिन उन्होंने इस मांग को खारिज कर दिया था। ऐसे में अब याची ने पिता की बहाली के लिए हाईकोर्ट की शरण ली है। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही आपराधिक मामले में बरी कर्मचारी अधिकार के तौर पर सेवा बहाल करने का दावा नहीं कर सकता लेकिन आपराधिक मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर करना जरूरी है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के इशारे पर याची के पिता को फंसाने की बात हाईकोर्ट 2010 के आदेश में कह चुका है। ऐसे में इस आपराधिक मामले में याचिकाकर्ता के पिता का कोई दोष नहीं था। हाईकोर्ट ने उन्हें बर्खास्त करने की तिथि से बहाल करने और सभी सेवा लाभ जारी करने का आदेश दिया है।

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