मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने संबंधी सरकार की नई नीति के तहत कांट्रैक्ट, एडहॉक, दिहाड़ीदार, वर्कचार्ज, कच्चे तौर पर तैनात मुलाजिमों को 58 साल की उम्र तक नौकरी में बनाए रखने का एलान किया था।
पंजाब सरकार की ओर से विभिन्न विभागों में कार्यरत 36000 कच्चे मुलाजिमों की नौकरी पक्की करने के लिए बनाई गई नीति का विरोध शुरू हो गया है। प्रदेश में कांट्रैक्ट मुलाजिमों के विभिन्न संगठनों ने सरकार की नीति को कर्मचारियों से धोखा करार देते हुए कहा है कि सरकार ने कच्चे मुलाजिमों को नौकरी में बनाए रखने की बात तो की है लेकिन 58 साल तक नौकरी करते हुए भी इन मुलाजिमों को ऐसा कोई लाभ नहीं मिल सकेगा, जो नियमित मुलाजिमों को अपनी पूरी नौकरी के दौरान मिलते रहते हैं।
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साझा मुलाजिम मंच पंजाब व यूटी के कन्वीनर सुखचैन सिंह खैरा ने कहा कि कच्चे मुलाजिमों को नई नीति के तहत जिस तरह पक्का किया जा रहा है, उससे केवल 58 साल की उम्र तक नौकरी ही पक्की हो रही है, लेकिन डीसी रेट पर काम कर रहे कच्चे मुलाजिमों को नियमित वेतनमान, महंगाई भत्ता, अन्य भत्ते, पेंशन, वेतन आयोग के तहत वेतन वृद्धि जैसा कुछ भी नहीं मिल सकेगा। संभवत: उन्हें बेसिक वेतन पर ही काम करना पडे़। उन्होंने कहा कि कच्चे मुलाजिमों के लिए सम्मानजनक नीति बनाई जानी चाहिए, ताकि नौकरी में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन्हें भी नियमित मुलाजिमों की तरह लाभ मिल सकें।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने संबंधी सरकार की नई नीति के तहत कांट्रैक्ट, एडहॉक, दिहाड़ीदार, वर्कचार्ज, कच्चे तौर पर तैनात मुलाजिमों को 58 साल की उम्र तक नौकरी में बनाए रखने का एलान किया था। हालांकि इस नीति में आउटसोर्स, इन्सेंटिव और अवैतनिक मुलाजिमों को शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा शर्त है कि इस नीति का लाभ केवल उन्हीं कच्चे मुलाजिमों को मिलेगा, जो विभिन्न विभागों में 10 साल से ज्यादा समय से लगातार काम कर रहे हैं और इस दौरान हर साल उनकी हाजिरी 240 दिन से कम नहीं है। इसके लिए सरकार एक स्पेशल कैडर का गठन करेगी।
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पंजाब के विभिन्न कर्मचारी संगठनों, जिनमें पनबस एसोसिएशन और आंगनबाड़ी एसोसिएशन भी शामिल है, ने सरकार की नीति का विरोध किया है। पनबस एसोसिएशन के अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि नई नीति में प्रदेश के करीब दो लाख आउटसोर्स मुलाजिमों को पूरी तरह बाहर कर दिया है। इस तरह वह भविष्य में भी ठेकेदार के रहमो-करम पर ही नौकरी करेंगे। वहीं बाकी कच्चे मुलाजिमों के लिए 10 साल नौकरी की शर्त लगाई गई है, जबकि कई विभागों में भर्ती की उम्र ही 45 साल तक है। इसके अलावा, कच्चे मुलाजिम की उम्र 58 साल होने पर रिटायरमेंट के साथ ही उसका पद भी समाप्त हो जाएगा। इससे साफ है कि सरकारी विभागों में भविष्य में नौकरियां नहीं दी जाएंगी। आंगनबाड़ी एसोसिएशन की अध्यक्ष हरजीत कौर पंजोला ने कहा कि यह नीति पंजाब के कच्चे मुलाजिमों को पक्की नौकरी नहीं दे रही और आप सरकार कच्चे मुलाजिमों से धोखा कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार सभी कच्चे मुलाजिमों को नियमित करे।