पंचकूला। सेक्टर-17 जैन स्थानक में साध्वी सुदक्षा जी महाराज के पावन सानिध्य में तप, त्याग और क्षमा का महान पर्व संवत्सरी मनाया गया।
इस अवसर पर साध्वी ने उपस्थित जनसमूह को धर्म उपदेश दिया। इसके अलावा समाज के कई लोगों ने भजन एवं नाटकों के माध्यम से अपने भाव प्रकट किए। श्री जैनेन्द्र गुरुकुल स्कूल के बच्चों ने और जैन समाज के लोगों ने गुरणी जी महाराज के निर्देशन में तैयार शिक्षाप्रद नाटक इंटरनेट, जंबु स्वामी का वैराग्य, मां की सीख, नियम का पालन आदि की प्रस्तुति दी। जिन्हें देखकर सभी दर्शक मंत्रमुग्ध होकर गए।
इस अवसर पर स्थानीय समाज के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम में पलिया, बिलासपुर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पानीपत, करनाल, उकलाना और नरवाना आदि स्थानों से अनेक लोग पहुंचे थे।
जैनों का सबसे बड़ा पर्व है संवत्सरी पर्व
जेपी जैन ने बताया कि संवत्सरी पर्व जैनों का सबसे बड़ा पर्व है जो कि आठ दिनों तक चलता है। इसमें सात दिनों तक अंतगड सूत्र का वाचन किया जाता है और आठवां दिन संवत्सरी कहलाता है। इस दिन जैन समाज के भाई-बहन और बच्चे अधिक से अधिक त्याग-तपस्या करते हैं। पौषध आदि की आराधना करते हैं और अपने द्वारा हुई जाने अनजाने में हुई भूल के लिए मन, वचन, काया से उत्तम क्षमा मांगते हैं।
आध्यात्मिक जागरण एवं मैत्री का संदेश लेकर आता है पर्व
यह पर्व आध्यात्मिक जागरण एवं मैत्री का संदेश लेकर आता है। उन्होंने बताया कि चतुर्मास के प्रारंभ से ही कई भाई-बहनों के लंबे उपवास भी चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेम चंद जैन बिचपड़ी वाले का आज 51वां आयंबिल का तप है। देवेन्द्र कुमार जैन का उपवास का 11वां दिन है। जैन समाज के लोग उपवास में केवल गर्म जल का सेवन करते हैं। समाज के दानवीर सुश्रावकों ने दिल खोलकर दान दिया।