डेढ़ साल के मासूम की किलकारियां सुनकर मां उसे गोद में उठा लेती है। उसे गले से लगाकर दुलराती है, लेकिन मासूम को नहीं पता वह किस गंभीर बीमारी से गुजर रहा है।
डेढ़ वर्षीय मासूम वंश को शुरूआत से ही देखने में दिक्कत आ रही थी। मां और पिता को जब इसकी भनक लगी तो वह आनन फानन अपने लाल को लेकर पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज के लिए ले गए।
डॉक्टरों ने उसकी एक आंख की सर्जरी की। गरीब मां, पिता को उम्मीद जागी कि उनका लाल अब देखने लगेगा, लेकिन स्थित इसके उलट रही और उस आंख की रोशनी जाती रही। बल्कि, अब दूसरी आंख से भी देखने में दिक्कत आ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि रेटिनोब्लास्टोमा, रेटना यानि आंखों के पर्दें में होने वाला कैंसर है। इसकी मुख्य वजह अनुवांशिक हो सकती है।
राजीव कालोनी निवासी वंश पीजीआई में जन्म से उपचाराधीन है। 16 सितंबर को डॉक्टरों ने उसकी एक आंख की सर्जरी की थी। माता-पिता को चिंता सता रही है कि उसे एक आंख की रोशनी चली गई, लेकिन कहीं अब दूसरी आंख से भी दिखाई देना बंद न हो जाए।
दादा बलवंत सिंह ने कहा कि उन्हें आंखों से नहीं दिखाई देने का उस वक्त पता चला जब बार-बार इशारे करने के बाद भी उससे कोई संकेत नहीं मिले। पिता तिलकराज ने कहा कि आंखों से नहीं दिखने की वजह से उन्हें भविष्य की चिंता सताने लगी है। पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के वरिष्ठ डॉक्टर एमआर डोगरा के मुताबिक रेटिना में होने वाले कैंसर की अनुवांशिक वजह के अलावा कुछ और कारण हो सकते हैं।
लेकिन, समय रहते अगर इसकी पहचान कर ली जाती है तो इलाज संभव है। अगर, दोनों आंखों में इस तरह की समस्या है तो 70-80 फीसदी अनुवांशिक कारण हैं।
डॉ. डोगरा के मुताबिक, साल में करीब 40 ऐसे मामले पीजीआई में आते हैं, जिससे बच्चे सर्वाधिक पीड़ित हो रहे हैं। इसके बचाव के लिए जरूरी है कि शुरुआती दौर में इसका इलाज कराया जाए।