चंडीगढ़। चाहे कोई भी धर्म हो, पूज्य देवताओं ने मनुष्य के रूप में जन्म लिया और समाज में उनके योगदान और उनके चरित्र के कारण उन्हें देवत्व प्राप्त हुआ। उनसे प्रेरित लोग विश्वास से उनकी पूजा करने लगे और नर से नारायण तक की यात्रा न केवल भारत के बल्कि भारत से बाहर जन्मे धर्मों के लिए भी सत्य है। भगवान वाल्मीकि को आरंभ में डाकू बताने के मामले में जालंधर में दर्ज एफआईआर रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की है। याचिका दाखिल करते हुए राणा जंग बहादुर ने बताया था कि वह फिल्म अभिनेता हैं और बीते 40 साल में उन्होंने हिंदी सहित अन्य भाषाओं में 500 फिल्में की हैं। उन्होंने उन्होंने 9 जून 2022 को टीवी चैनल को इंटरव्यू दिया था। इस इंटरव्यू में उनसे पूछा गया था कि फिल्मों में हथियारों के महिमा मंडन के कारण लोग गैंगस्टरों से प्रभावित हो रहे हैं। इसके जवाब में उन्होंने कुछ उदाहरण देकर इसका विरोध किया था।
उन्होंने भगवान वाल्मीकि जी के संदर्भ में कहा था कि पहले वे डाकू थे, लेकिन बाद में वह बिल्कुल बदल गए और रामायण की रचना की थी। ऐसे में याची का किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का कोई इरादा नहीं था। हालांकि, राज्य सरकार ने एफआईआर को रद्द करने की याचिका का विरोध करते हुए दावा किया था कि अभिनेता भगवान वाल्मीकि के बारे में अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का दोषी है।
याचिकाकर्ता का साक्षात्कार इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे एक समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि चाहे कोई भी धर्म हो, पूज्य देवताओं ने मनुष्य के रूप में ही जन्म लिया। समाज में उनके योगदान और उनके चरित्र की मजबूती के कारण उन्हें देवत्व प्राप्त हुआ। उनसे प्रेरित होकर और उन पर विश्वास करके लोग उनकी पूजा करने लगे। नर से नारायण तक की यात्रा न केवल भारत के लोकाचार में समाहित है, बल्कि भारत से बाहर जन्मे धर्मों के लिए भी सत्य है। इस प्रकार, महर्षि वाल्मीकि के परिवर्तन से संबंधित कहानी लोककथा का हिस्सा है जो शायद शिकायतकर्ता को पसंद नहीं है। एफआईआर को आगे जारी रखना ठीक नहीं होगा क्योंकि धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले को आगे बढ़ाने के लिए आरोप पर्याप्त नहीं हैं।