पंचकूला। गांव देवी नगर के लोगों को 20 एकड़ जमीन के मामले में भले ही कोर्ट से राहत मिल गई है, लेकिन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने परेशानी को बढ़ा दिया है। एक महीने से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन विभाग द्वारा गठित आठ सदस्यीय टीम पैमाइश का कार्य पूरा नहीं कर पाई है। गांव के लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी इस मामले को एक सोची-समझी साजिश के तहत लटका रहे हैं, ताकि उन्हें जमीन का मालिकाना हक न देना पड़े। जबकि, कोर्ट अपने फैसले में प्रशासनिक अधिकारियों को जमीन का मालिकाना हक देने का आदेश दे चुकी है। इसके बाद भी अधिकारी ढुलमुल रवैया अपना रहे हैं। उधर, एचएसवीपी के प्रशासक धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि अभी तक इस मामले में उनके पास कोई रिपोर्ट नहीं आई है, जैसे ही फाइनल रिपोर्ट आएगी कार्रवाई करेंगे।
गांव देवी नगर की 20 एकड़ जमीन का मालिकाना हक 16 जून को प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के संपदा विभाग का कोई अधिकारी न पहुंचने पर कार्य पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद विभाग के मुख्य प्रशासक ने इस मामले को लेकर 18 जून को अधिकारियों की मीटिंग बुलाई। जिसमें उन्होंने फैसला लिया कि आठ सदस्यीय टीम गठित होगी और जमीन की पैमाइश दोबारा होगी। इसके बाद किसी तरह का फैसला लिया जाएगी। 2 जुलाई को आठ विभागीय अधिकारियों की संयुक्त टीम गांव देवी नगर में जमीन की पैमाइश करने पहुंचे, लेकिन जीपीएस मशीन साथ लाना ही भूल गई थी, जिसके चलते पैमाइश नहीं हो पाई। अधिकारियों ने गांव वालों को आश्वासन दिया था कि वह जल्द मशीन के साथ पैमाइश करेंगे।
इसके बाद 6 जुलाई को टीम में शामिल अधिकारी दलबल के साथ गांव में जमीन की पैमाइश करने पहुंचे। उन्होंने करीब तीन घंटे पैमाइश के कार्य को अंजाम दिया, लेकिन वह इस कार्य को बीच में छोड़कर लौट गए। अधिकारियों ने कहा कि गांव के आगे जंगल है जिसके चलते पैमाइश के लिए बड़ी जीपीएस मशीन की आवश्यकता है। इसके बाद किसी भी अधिकारियों ने गांव देवी नगर की तरफ देखना उचित नहीं समझा। ज्वाइंट कमेटी में इस्टेट ऑफिसर, एलएओ पंचकूला, डीटीपी पंचकूला, तहसीलदार पंचकूला, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एचएसवीपी डिविजन नंबर-2 पंचकूला, सीनियर मैनेजर (इंजीनियरिंग) एचएसआईआईडीसी आईई बरवाला, नायब तहसीलदार हरियाणा फारेस्ट डिपार्टमेंट, बच्चा राम और अन्य याचिकाकर्ता शामिल हैं।
गांव देवी नगर निवासी रघुबीर चौधरी ने कहा कि जमीन का जीपीएस के जरिए दो बार सर्वे हो चुका है। पहला सर्वे गांव के लोगों द्वारा करवाया गया, जिसकी रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सेक्टर-22 स्थित आईटी पार्क के प्लॉट नंबर-1 में आईटी कंपनी की इमारत आधी से ज्यादा गांव वासियों की जमीन पर बनी है। जबकि, दूसरा सर्वे वन विभाग ने करवाया, जिसकी रिपोर्ट में सामने आया कि कंपनी का आगे का आधा हिस्सा उनकी जमीन में है। लेकिन, एचएसवीपी के प्रशासक ने जिला प्रशासन, एचएसआईआईडीसी और एचएचएसवीपी के संपत्ति विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त मीटिंग में पहले की निशानदेही को नामंजूर कर दिया और एक संयुक्त कमेटी गठित कर दोबारा पैमाइश करने का आदेश दिया।
16 जून को मालिकाना हक दिलाने पहुंचे थे अधिकारी
गांव देवी नगर निवासी रघुबीर चौधरी ने बताया कि एचएसआईआईडीसी ने सेक्टर-22 में इंफारमेशन टेक्नोलॉजी पार्क विकसित करते हुए जमीन को आगे आईटी इंडस्ट्री को अलॉट कर दिया, जो उसकी थी ही नहीं। अब इस जगह आईटी पार्क की सबसे ऊंची बिल्डिंग बनी है। यहां बनी 12 मंजिला बिल्डिंग पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं, क्योंकि कोर्ट ने जमीन पर गांव देवीनगर के निवासियों के मालिकाना हक को सही बताया है। इनमें कालका के विधायक प्रदीप चौधरी की भी यहां जमीन है। कोर्ट के निर्देश पर 16 जून को तहसीलदार पुण्यदीप शर्मा के नेतृत्व में पंचकूला प्रशासन की टीम गांव देवीनगर के निवासियों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने के लिए पहुंची थी।
कोर्ट ने फैसले में माना कि कुछ जमीन गांव की
साल 2015 में कोर्ट ने दिए अपने फैसले में माना कि जिस जगह पर आईटी कंपनी की बिल्डिंग बनी है वह जगह देवीनगर गांव के निवासियों की है। रेवेन्यू रिकॉर्ड में भी आज तक जमीन का अधिग्रहण करने पर किसी को मुआवजा नहीं दिया गया है। आईटी कंपनी की बिल्डिंग वाली जमीन के अलावा गोल्फ क्लब, पंचकूला भी उनकी ही जमीन पर बना है। किसी ने उनकी जमीन पर कब्जा कर मंदिर भी बनाया हुआ है। कोर्ट का गांववासियों के पक्ष में फैसला आने के बाद देवीनगर के निवासियों ने साल 2015 में जमीन का कब्जा लेने के लिए केस डाला था। कोर्ट से जमीन खाली कराने की मांग की गई। कोर्ट ने 23 नवंबर 2019 को पंचकूला के तहसीलदार को जमीन खाली कराने और उन्हें मालिकाना हक देने के आदेश दिए थे। इसके बाद से ही गांव देवी नगर निवासियों को जमीन का कब्जा देने की प्रक्रिया चल रही थी।
कब्जा अब तक
- 2003: एचएसवीपी ने जमीन एचएसआईआईडीसी को आईटी पार्क विकसित करने के लिए दे दी थी।
- 2010: देवीनगर के निवासियों ने अपनी जमीन की सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर निशानदेही कराई थी। इसके बाद से वह अपनी जमीन वापस लेने के लिए पंचकूला कोर्ट में केस लड़ रहे थे।
- 2014: एचएसआईआईडीसी ने यहां आईटी कंपनियों को प्लॉट अलॉट कर दिए।
2015: गांववालों ने अपने हक के लिए कोर्ट में केस डाला। कोर्ट ने माना था कि जिस जगह पर आईटी कंपनी की बिल्डिंग बनी है, वह जगह देवीनगर गांव के निवासियों की है।
- 23 नवंबर 2019: कोर्ट ने पंचकूला के तहसीलदार को गांववासियों की जमीन खाली कराने और उन्हें कब्जा देने के निर्देश दिए।
बिल्डिंग गिरेगी या मुआवजा मिलेगा?
- 200 करोड़ से ज्यादा बनेगा मुआवजा कोर्ट के निर्देशों पर गांववालों को जमीन का कब्जा देने के लिए या तो बिल्डिंग को गिराना होगा या जमीन अधिग्रहण का मुआवजा देना होगा। अगर मुआवजा देने का फैसला किया जाता है तो यह 200 करोड़ से ज्यादा बन सकता है। रेवेन्यू रिकॉर्ड में भी आज तक इस जमीन का अधिग्रहण करने पर किसी को मुआवजा नहीं दिया गया है।
- 17,000 करोड़ का लोन पहले ही है एचएसवीपी पर एचएसवीपी पहले ही कर्ज के बोझ तले दबा है। कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए एचएसवीपी पर लगभग 17 हजार करोड़ का लोन है। ऐसे में मुआवजा देना एचएसवीपी के लिए भारी पड़ सकता है।
- 60-70 करोड़ में बनी है आईटी कंपनी की बिल्डिंग आईटी कंपनी की 14 मंजिला बिल्डिंग के निर्माण पर करीब 60-70 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसे तोड़ना भी संभव नहीं है। इस वजह से एचएसवीपी के अधिकारी कमेटियां बनाकर और दोबारा निशानदेही की बात कहकर मामले को टालने में लगे हैं।