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पीयू मे दो करोड़ घोटाले मामले में चालान पेश

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी पेंशन सेल से दो करोड़ रुपये के घोटाला के केस की सुनवाई मंगलवार को जिला अदालत में हुई। इस दौरान पुलिस ने अदालत में सप्लीमेंट्री चालान पेश किया। चालान में मुख्य आरोपी पीयू की पूजा बग्गा की लिखावट की सीएफएसएल रिपोर्ट शामिल है। सीएफएसएल रिपोर्ट से यह साबित हुआ है कि आपूर्ति और संलग्न भाग की हैंडराइटिंग समान है और यह एक ही इंसान द्वारा लिखा गया है। सीएफएसएल मई 2006 से मार्च 2016 तक की पेंशन सेल की कैशबुक के साथ आरोपी पूजा बग्गा की हैंडराइटिंग के सैंपल की जांच कर रहा था।
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पीयू कांउसिल अजय सूद ने दलील दी कि आरोपी पूजा बग्गा और नरेश सभ्रवाल ने पुराने वाउचर को पीयू के रिकॉर्ड रूम से निकालकर यूनिवर्सिटी फंडों में सेंध लगाने की आपराधिक साजिश रची थी। पुराने वाउचर पर ओवर राइटिंग और कटिंग करके उन्होंने गड़बड़ी की और नए सिरे से चेक जारी किए। उसके बाद पूजा बग्गा और अन्य आरोपियों के बैंक खातों में रकम हस्तांतरित कर दी गई।
अभियोजन और जांच अधिकारी ने तीसरी बार पूजा बग्गा की हैंडराइटिंग के सैंपल लिए थे। बीते 6 अगस्त को कोर्ट ने तत्कालीन एसएचओ को सीएफएसएल की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने केलिए नोटिस जारी किया था। बचाव पक्ष के वकील तरमिंदर सिंह ने उल्लेख किया है कि तीसरी बार हैंडराइटिंग सैंपल लेने के लिए जांच अधिकारी ने याचिका में कहा था कि सीएफएसएल इस पर स्पष्ट नहीं है, इसलिए वह दोबारा सैंपल लेना चाहते हैं। उसके बाद दोबारा आईओ द्वारा कोर्ट में सैंपल लिया गया था। उसके बाद भी सीएफएसएल में रिपोर्ट में लिखा गया कि वह कोई रिपोर्ट नहीं दे सकते, क्योंकि रिपोर्ट देने के लिए तथ्य पर्याप्त नहीं हैं।
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क्या है मामला
मामला 7 सितंबर 2015 का है। पंजाब यूनिवर्सिटी पेंशन सेल से करीब दो करोड़ रुपये धोखाधड़ी से निकालने के आरोप में कर्मचारी पूजा बग्गा को सेक्टर-11 थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पीयू के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर (सीएसओ) जतिंदर ग्रोवर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। एफआईआर के मुताबिक पेंशन सेल में पूजा बग्गा एक क्लर्क थी। पूजा ने पुराने वाउचर का दोबारा इस्तेमाल करके अपने परिवार के सदस्यों के खातों में करीब दो करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। इसके बाद फरवरी 2019 में पूजा बग्गा और परिवार के छह सदस्यों सहित दस लोगों के खिलाफ कोर्ट ने आरोप तय किए थे। इसमें नरेश सभ्रवाल, जतिंदर सिंह, बलजिंदर, संपूर्ण सिंह, सरिता देवी, परमजीत कौर, रवि कुमार, अविनाश और ऋषि कुमार शामिल थे। पुलिस ने सभी के खाते की जांच करके 92 लाख रुपये भी बरामद किए थे। उसके बाद मामले में आरोपियों पर आईपीसी की धारा 408, 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत आरोप तय किए गए थे।
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