चंडीगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि सरकार द्वारा आगामी खरीफ सीजन के लिए घोषित किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य किसी भी पैमाने पर लाभकारी साबित नहीं सकते। अधिकांश फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी वर्तमान मुद्रास्फीति की दरों व केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए घोषित किए गए महंगाई भत्ते की दरों से भी कम हैं।
चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में प्रेसवार्ता के दौरान डल्लेवाल ने कहा, न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी घोषित करने के बाद डीजल के दामों में की गई बढ़ोतरी से किसानों की लागत में काफी इजाफा हुआ है। साल 2013 से लेकर 2025-25 तक न्यूनतम समर्थन मूल्य में औसतन 73% की वृद्धि केंद्र सरकार द्वारा की गई है जबकि इसी अवधि के दौरान विभिन्न फसलों की पैदावार पर होने वाले लागत मूल्यों में 78 से 90% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे साबित होता है कि किसान की फसलों पर होने वाला मुनाफा 2013 के स्तर से भी कम हो गया है और किसान की आमदनी दोगुना करने की बात जुमला बन कर रह गई है।
किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि यदि सरकार फसलों की एमएसपी पर खरीद की गारंटी दे तो सरसों, सूरजमुखी, दालों, तोरिया, तिल आदि की खेती का रकबा बढ़ जाएगा और जल्द ही हम खाद्यान तेलों में आत्मनिर्भर बन जाएंगे जिस से खाद्यान तेल के आयात की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे विदेशी मुद्रा भंडार की भी भारी बचत होगी।
उत्तर प्रदेश के किसान नेता दिनेश शर्मा ने कहा कि 17 मई को मेरठ में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) से संबंधित किसान संगठनों की होने वाली मीटिंग में इस संशोधन के खिलाफ आगामी रणनीति पर चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर मलकीत सिंह, कुंवरपाल अहलावत, गुरदास सिंह, बेगराज सिंह, हर्षदीप गिल, शमशेर पूनिया, रामफल शर्मा, दलबीर मिठान, अधिवक्ता कंवरजीत सिंह, बलप्रीत सिंह पन्नू आदि उपस्थित रहे।