चंडीगढ़। विजिलेंस ब्यूरो ने वर्ष 2025 में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के दौरान विभिन्न मामलों में 187 व्यक्तियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान विजिलेंस ब्यूरो ने 127 ट्रैप लगाकर विभिन्न विभागों के 144 सरकारी कर्मचारियों और 43 निजी व्यक्तियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए विजिलेंस ब्यूरो ने 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2025 तक 18 राजपत्रित अधिकारियों और 126 गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। इस दौरान पंजाब पुलिस के 43, राजस्व विभाग के 20, बिजली विभाग के 21, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 14, परिवहन विभाग के 9, स्थानीय निकाय विभाग के 8, वन विभाग के 5, स्वास्थ्य विभाग के 5 और मंडी बोर्ड के 3 कर्मचारियों को अलग-अलग मामलों में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
इनके अतिरिक्त शिक्षा, सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और कार्मिक विभाग के भी दो-दो कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में काबू किया गया। ब्यूरो ने आरोपियों के खिलाफ 113 आपराधिक मामले दर्ज किए हैं जिनमें 17 राजपत्रित अधिकारी, 98 गैर-राजपत्रित कर्मचारी और 118 निजी व्यक्ति शामिल हैं।
इसके अलावा 17 राजपत्रित अधिकारियों, 20 गैर-राजपत्रित कर्मचारियों और 15 निजी व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच के लिए 38 विजिलेंस जांच (इन्क्वायरी) भी दर्ज की गई हैं। साथ ही 4 राजपत्रित अधिकारियों, 5 गैर-राजपत्रित कर्मचारियों और 2 निजी व्यक्तियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के 10 मामले भी दर्ज किए गए हैं।
अदालतों द्वारा दोषी ठहराए जाने पर 6 गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को उनके संबंधित प्रशासनिक विभागों द्वारा सेवा से बर्खास्त भी किया गया है। विभिन्न अदालतों ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ब्यूरो द्वारा दर्ज और लड़े गए 34 मामलों में 63 आरोपियों को सजा सुनाई है जिनमें 3 राजपत्रित अधिकारी, 38 गैर-राजपत्रित कर्मचारी और 22 निजी व्यक्ति शामिल हैं।
वर्ष 2025 के दौरान भ्रष्टाचार के मामलों में पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया, विधायक रमन अरोड़ा, आईपीएस अधिकारी हरचरण सिंह भुल्लर, जालंधर से सहायक आयुक्त सीजीएसटी रविंदर कुमार शर्मा, बटाला से पीसीएस अधिकारी विक्रमजीत सिंह पांथे समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी विजिलेंस ने कार्रवाई की।