पंचकूला। सेक्टर-15 के श्री रघुनाथ मंदिर पंचकूला में रविवार को श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन स्वामी डॉ. रमनीक कृष्ण जी महाराज ने कहा कि विपरीत समय में सभी मुंह मोड़ लेते हैं। केवल परमात्मा के सुमिरन से दुख का निवारण होता है। गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए कहा कि वन में परिवार के साथ गजेंद्र नाम का गजराज रहा करता था। वह बड़ा बलशाली था। उसे अपने शारीरिक बल पर बड़ा अभिमान था। वन के जीव उसके सामने आने से डरते थे। एक दिन वह पत्नी व बच्चों के साथ नदी में स्नान करने गया। इस दौरान सूंड से जल भर भरकर वो पत्नी व बच्चो पर गिराने लगा। देवमाया से प्रेरित एक ग्राह ने आकर गज के पांव को जकड़ लिया। गज ने बड़ा प्रयत्न किया मगर पांव को न छुड़ा पाया। पत्नी भी अब साथ छोड़कर जाने लगी। गज ने कहा हे देवी! मैं तुम सबके लिए हर बुरे समय में लड़ता रहा पर जब आज मेरा बुरा समय आया तुम सब मेरा साथ छोड़कर जाने लगे। पत्नी बोली- तुम तो मर ही रहे हो क्या हम भी तुम्हारे साथ मर जाएं, ऐसा कहकर पत्नी साथ छोड़कर चल पड़ी। गज ने मन ही मन विचार किया इस झूठे जगत के लिए उसने क्या नहीं किया।
गज ने नदी में खिले हुए एक पुष्प को तोड़ा और भाव से वो पुष्प भगवान को अर्पित किया। भाव का पुष्प सीधा बैकुंठ में भगवान के चरणों में चढ़ा। भगवान भक्त की रक्षा के लिए चल पड़े। गज के पास पहुंचने से भगवान ने अपना सुदर्शन चक्र चलाया और ग्राह की गर्दन धड़ से अलग कर दी। गज को भगवान ने हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। सत्य है जीवन के विपरीत समय में दुनिया हमारे काम नहीं आएगी, केवल परमात्मा ही काम आएंगे जिनका हमने कभी मन से स्मरण नहीं किया। इस अवसर पर बड़े हर्ष के साथ ठाकुर जी का जन्म महोत्सव मनाया गया जिसमें बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित हुए।