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वार्डबंदी के लिए गठित एडहॉल कमेटी विवादों में, प्रमुख दलों को बाहर रखा

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पंचकूला। नगर निगम चुनाव को लेकर प्रशासन द्वारा गठित की गई एडहॉक कमेटी पर विवाद शुरू हो गया है। कमेटी में जहां कई प्रमुख पार्टियों के सदस्यों को शामिल ही नहीं किया गया, वहीं एक सत्तारूढ़ पार्टी के तीन सदस्यों को शामिल करने से लोगों में काफी रोष है और कमेटी को गैर संवैधानिक करार दिया है।
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निकाय चुनाव को लेकर होने वाली वार्ड बंदी पर विचार-विमर्श करने के लिए सेक्टर-1 स्थित जिला लघु सचिवालय में 7 अगस्त को बैठक होगी। इस बैठक में वार्ड बंदी पर चर्चा की जाएगी। एडहॉक कमेटी का गठन वीरवार को पंचकूला के उपायुक्त द्वारा किया गया है। कमेटी में महानिदेशक शहरी स्थानीय निकाय विभाग, संयुक्त आयुक्त नगर निगम पंचकूला, नगर परिषद के पूर्व उपप्रधान एवं हरियाणा विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता, समर्थक बीबी सिंघल, गांव अभयपुर निवासी भाजपा जिला महासचिव हरेंद्र मलिक और भाजपा के पूर्व पार्षद सीबी गोयल को शामिल किया गया है। यह तीनों ही सत्तारूढ़ दल से हैं। कांग्रेस से दो महिलाएं जोकि पूर्व पार्षद हैं उन्हें लिया गया है। पूर्व पार्षद लिली बाबा और कांता देवी को कमेटी में लिया गया है। जबकि इस कमेटी से इंडियन नेशनल लोकदल, जननायक जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी को बाहर रखा गया है।
इस कमेटी के गठन पर पूर्व नगर परिषद प्रधान रविंद्र रावल ने कहा कि कमेटी का गठन नगर निगम एक्ट प्रावधान के विरुद्ध है। क्योंकि न तो नगर निगम ने पंचकूला निगम से कालका, पिंजौर क्षेत्र निकालने के बाद अधिसूचना जारी की है और ना ही जनता से ऑब्जेक्शन मांगी है, जबकि इस प्रक्रिया को पूरा करना कानून जरूरी था। इसके अलावा न ही जनसंख्या का स्पॉट डाटा कलेक्ट किया। सीधे ही मनमाने ढंग से वार्ड बंदी करने के लिए भाजपा की अधिकता वाले सदस्यों की एक गैर कानूनी समिति बना दी, जो न केवल गलत बल्कि सत्ता का खुला दुरुपयोग है। जब बनाए जाने वाले वार्डों की जनसंख्या का सही डाटा ही उपलब्ध नहीं तो समिति वार्ड बंदी कैसे करेगी। रविंद्र रावल ने इस निर्णय का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो इसे न्यायिक चुनौती भी देंगे।
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