माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-5 के मंडी ग्राउंड में बंगीय परिषद ने विजय दशमी पर मां दुर्गा की पूजा कर सिंदूर खेला और प्रसाद का वितरण किया। इसके बाद मां दुर्गा को घग्गर नदी में विसर्जित किया गया। इससे पहले सिंदूर की थाल सजाकर बंगीय परंपराओं के क्रम में महिलाओं ने सबसे पहले देवी के माथे पर सिंदूर अर्पित करने के बाद एक दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सुहाग की कामना की।
इसके बाद खुशियों से सराबोर होकर मां के पंडाल में नाच-गाने की परंपरा निभाई। महिलाओं ने प्रसाद का भोग लगाकर आपस में खुशियां साझा की। ढोल की थाप ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। महिलाओं ने मां दुर्गा से आशीष मांगा और अगले बरस जल्दी आने की कामना कर अश्रुपूर्ण विदाई दी। इसके बाद एक-एक कर देवी दुर्गा की मूर्तियां विसर्जन के लिए उठाई गईं। इसके बाद घग्गर नदी में मूर्तियां विसर्जित की गईं। इस मौके पर सुमंतो घोष, तपन, पार्थो बनर्जी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
यह है मान्यता
परिषद के सदस्य सुमंतो घोष ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा नवरात्र में नौ दिनों के लिए अपने मायके आती हैं। इस दिन ज्यादातर महिलाएं बंगाली साड़ी ही पहनती हैं। लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी इस पर्व की पहचान बन गया है। उन्होंने बताया कि रस्म मां दुर्गा को विदाई देने के लिए मनाई जाती है। बंगाली रीति रिवाज में सिंदूर खेलने की परंपरा करीब 450 साल पुरानी है। इस दिन विवाहित महिलाएं मां दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी का शृंगार कर उनकी पूजा करती हैं।