सीएम फ्लाइंग जांच में सामने आया मामला, करोड़ों की वन भूमि पर कब्जे के खेल के बीच वन संपदा को भी पहुंचाया नुकसान
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। मोरनी ब्लॉक में केवल जमीनों की कथित फर्जी शिफ्टिंग का ही खेल नहीं चल रहा, बल्कि इसकी आड़ में वन संपदा को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते (सीएम फ्लाइंग) की गुप्त जांच में खुलासा हुआ है कि प्रॉपर्टी डीलरों ने सड़क किनारे कब्जा जमाने के उद्देश्य से खसरा नंबर-30 में बिना अनुमति 16 हरे-भरे पेड़ काटकर बेच दिए।
जांच टीम के मौका निरीक्षण के दौरान घटनास्थल पर पेड़ों के कटे हुए अवशेष (मुड्डियां) मिले। रिपोर्ट के अनुसार जिस क्षेत्र में यह कटान किया गया, वह पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम, 1900 की धारा 4 और 5 के तहत संरक्षित वन क्षेत्र में आता है। इस क्षेत्र में बिना प्रशासनिक अनुमति पेड़ों की कटाई पूरी तरह प्रतिबंधित है।
इसके बावजूद आरोपियों ने नियमों की अनदेखी कर सुरक्षित वन क्षेत्र में अवैध कटान को अंजाम दिया। जांच रिपोर्ट में इस मामले में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित वन क्षेत्र से बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने के बावजूद विभाग की ओर से कोई प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर भू-माफिया को लाभ पहुंचाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों ने संबंधित विभागों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
कोट
मोरनी-टिक्कर ताल मुख्य मार्ग की प्राइम लोकेशन पर स्थित वन विभाग की करोड़ों रुपये की जमीन पर पिलर और कंटीली तार लगाकर अवैध कब्जा करवाने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- सतपाल शर्मा, उपायुक्त, पंचकूला