पंचकूला। जिले में अवैध कॉलोनियां धड़ल्ले से काटी जा रही हैं, लेकिन भू-माफिया पर विभागीय अधिकारी शिकंजा कसने में विफल साबित हो रहे हैं। अमर उजाला टीम तीन दिन से जिले में माफिया द्वारा काटी जा रहीं अवैध कॉलोनियों का खुलासा कर रहा है। जिले में कट रहीं अवैध कॉलोनियों का मामला सामने आने के बाद नगर निगम और जिला नगर योजनाकार विभाग में हड़कंप मच गया है। विभागीय अधिकारी कार्रवाई के नाम पर कार्यक्षेत्र को लेकर आमने-सामने हैं। रामगढ़, माणक्य, गढ़ी कोटाहा और गांव सुखदर्शनपुर के बाद माफिया स्टालम फैक्ट्री के ठीक सामने अवैध कॉलोनी को काट रहा है। यहां काटी गई कॉलोनी में कारीगर मकान के निर्माण का कार्य कर रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों में मची खलबली
वहीं, माफिया भी कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने लगा है। मंगलवार को रायपुररानी और बरवाला में अवैध कालोनियों का मामला चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भू-माफिया नगर निगम और जिला नगर योजनाकार विभाग से बिना मंजूरी लिए ही कॉलोनियों को काट रहा है। इतना ही नहीं माफिया ने छोटे-छोटे प्लॉट काटकर मकान का निर्माण कार्य भी शुरू करवा दिया है।
डीटीपी की टीम ने किया मौके का निरीक्षण
रामगढ़, माणक्य, गढ़ी कोटाहा, त्रिलोकपुर चौक से डंटारू को जाने वाले मार्ग पर, स्टालम फैक्ट्री और गांव सुखदर्शनपुर के पास काटी गई कालोनियों का जिला नगर योजनाकार विभाग के अधिकारियों की टीम ने मंगलवार को दौरा कर निरीक्षण किया। विभागीय अधिकारी लता हुड्डा ने बताया कि जिस स्थान पर कॉलोनी काटी गई है वह उनके कार्य क्षेत्र से बाहर है। ऐसे में कार्रवाई नगर निगम के बिल्डिंग विभाग का बनता है। वहीं, दूसरी ओर अवैध कालोनियों का मुद्दा संज्ञान में आने के बाद भी निगम का बिल्डिंग विभाग सोया हुआ है। विभागीय अधिकारियों ने कार्रवाई तो दूर निरीक्षण करना भी उचित नहीं समझा। जबकि पूरे मामले की जानकारी कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक है। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि अवैध कॉलोनियां कैसे कट रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में नहीं कट सकती कॉलोनी
रामगढ़, माणक्य, रायपुररानी और बरवाला के लोगों ने क्षेत्र में निर्माण कार्य के लिए नगर निगम या फिर जिला नगर योजनाकार विभाग से मंजूरी लेना आवश्यक है। लेकिन कई स्थानों पर बिना किसी मंजूरी के ही भू-माफिया ने कालोनी काटकर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया है। ऐसे में जहां आमजन को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, वहीं विभाग को भी करोड़ों का चूना लग रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस दिशा में ठोस कार्रवाई की मांग की है।