चंडीगढ़। प्रदेश के सड़क एवं भवन निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अधिकारियों को चेताया कि प्रोजेक्ट्स में देरी के लिए सीधे रूप से विभाग के आला अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। यदि कोई प्रोजेक्ट प्रशासनिक स्तर पर लेट होता है तो उसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेवार होंगे और प्रोजेक्ट को लटकाने वाले अधिकारियों के वेतन से इसकी वसूली की जाएगी। दुष्यंत चौटाला मंगलवार को लोक निर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग के अधीन प्रदेश में चल रहे 25 से 50 करोड़ तक की लागत के 42 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। इनमें 18 प्रोजेक्ट्स सड़क, आरओबी, अंडरपास आदि से संबंधित तथा 24 प्रोजेक्ट्स अस्पताल, खेल व न्यायाधीशों के मकान, चिल्ड्रन होम, विभागीय कार्यालयों के भवन आदि से संबंधित थे।
बैठक में लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक निगम के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि अधिकारी आपस में तालमेल कर अड़चनों को दूर करवाकर फाइल वर्क स्वयं पूरा करवाएं, ताकि जनता को समय पर सड़क, पुल, अस्पताल व अन्य सरकारी भवनों का लाभ समय पर मिल सके।
उपमुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि अधिकारी स्वयं साइट विजिट करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इंजीनियर इन चीफ हर तीन माह में अधिकारियों के साथ बैठक करें। सर्कल में अधीक्षक अभियंता प्रति माह और कार्यकारी अभियंता हर 15 दिन में बैठक कर प्रोजेक्ट का स्टेट्स जाने और इसकी रिपोर्ट वे मुख्यालय को भेजें। बैठक में विभिन्न प्रोजेक्ट के लागत आखिरी समय में रिवाइज करने के चलन पर रोक लगाने को लेकर भी डिप्टी सीएम ने सख्ती दिखाई। सरकारी भवनों में कुछ समय बाद सीलन आने का मुद्दा भी इस बैठक में आया। डिप्टी सीएम ने सीलन की समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों को सरकारी भवनों में पीवीसी पाइप का प्रयोग करने के आदेश दिए।