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पेरिस नहीं तो चंडीगढ़ से कम भी नहीं है म्हारा पंचकूला

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पंचकूला। 15 अगस्त 1995 को पंचकूला को जिला का दर्जा मिला। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल ने कहा था -मैं पंचकूला को पेरिस की तरह बनाना चाहता हूं। नौ महीने बाद ही हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) की सरकार आ गई और बंसीलाल मुख्यमंत्री बने। फिर ओमप्रकाश चौटाला और उनके बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा का राज आ गया। अब सीएम मनोहर लाल की चलती है। पंचकूला पेरिस तो नहीं बन पाया, लेकिन चंडीगढ़ से कदम से कदम मिलाकर चल रहा है।
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लोग अब पंचकूला को हरियाणा की राजधानी के रूप में देखते हैं। यहां 27 सालों में हायर एजुकेशन से लेकर अतंरराष्ट्रीय स्तर के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, बसों की कनेक्टिविटी सहित अदालत, सचिवालय जैसी तमाम सुविधाओं में इजाफा हुआ है। पंचकूला सुंदरता में चार चांद लगाने के लिए वेलकम गेट से लेकर यहां पर गोल चक्कर सहित कई चौक बनाए गए हैं। साथ ही देश के शहीदों की बलिदान को याद रखने के लिए पंचकूला के कम्युनिटी सेंटरों के नाम शहीदों के नाम पर रखे जा रहे हैं ताकि देश की युवा पीढ़ी सीख ले सकें। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा के साथ ही लोगों को मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना का लाभ मिल रहा है।
पब्लिक डीलिंग के काम के लिए अंबाला पर निर्भर थे, लोग
27 साल पहले पचंकूला में सरकारी विभागों का मुख्यालय गिने-चुने थे। जिला बनने के बाद सबसे बड़ा बदलाव आया कि हरियाणा के ज्यादातर विभागों के मुख्यालय चंडीगढ़ से पंचकूला में शिफ्ट हो गए। वहीं जिला अदालत, सीबीआई और एनआईए अदालत और सचिवालय भी पंचकूला को मिला। प्रशासन की बात करें तो यहां के अधिकारी जिला बनने से पहले बैठक अटेंड करने अंबाला जाना पड़ता था और जिसके चलते अधिकारियों का पूरा दिन खराब हो जाता था। ऐसे में कार्यालय और पब्लिक डीलिंग का काम प्रभावित होता था। अब पंचकूला में ही जिला सचिवालय बनने के बाद हर तरह की बैठक होने लगी हैं, जिससे अधिकारियों के समय के साथ साथ पब्लिक डीलिंग के काम भी सुचारु तरीके से हो रहे हैं।
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निफ्ट जैसे शिक्षण संस्थान विद्यार्थी ग्रहण कर रहे शिक्षा
जिला बनने से पहले घग्गर पार के सेक्टर नहीं बसे थे। आज वहां सेक्टर- 23 में देश का 17वां राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) का कैंपस बनकर तैयार हो गया है। यहां ट्राइसिटी के विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इस शिक्षण संस्थान में 20 फीसदी सीटें हरियाणा के निवासियों के लिए आरक्षित हैं। इन 27 सालों में दो डिग्री कॉलेज और एक पॉलिटेक्निक कॉलेज भी पंचकूला को मिले हैं। इन कॉलेज प्रोफेशनल कोर्स भी चलाए जा रहे हैं, जिनका लाभ स्थानीय विद्यार्थियों मिल रहा है।
27 सालों में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स
पंचकूला के खिलाड़ियों और एथलीटों के लिए बुनियादी आधारभूत संरचना को और मजबूती प्रदान करते हुए खेल विभाग ने 27 सालों में धीरे-धीरे पैमाने और संचालन का विस्तार किया। इसके चलते ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स (टीडीएलएससी) अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनकर तैयार हो गया है। इसमें आठ लेन का सिंथेटिक ट्रैक, हॉकी एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड, बास्केटबॉल और वालीबॉल के इंडोर ग्राउंड, 40 बाई 80 का फुटबॉल ग्राउंड, मल्टीपर्पज हॉल, बाक्सिंग हॉल और खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल जैसी सुविधाएं आज के समय मिल रही हैं।
नौ सेक्टरों को डेवलप किया
जिला बनने के बाद एमडीसी सेक्टर-2, 4, 6 को बसाया गया। वहीं घग्गर पार एरिया के सेक्टर-23, 24, 25, 26, 27, 28 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने 1994 प्लॉट काटने शुरू कर दिए थे। पिछले 27 सालों में जिला बनने के बाद इन सेक्टरों में विकास कार्य हुए हैैं। सेक्टरों के मार्केट से लेकर सड़कों का निर्माण किया गया। आज लाखों लोग यहां रहते हैं।
बसों की कनेक्टिविटी बढ़ी
मई 2018 को पंचकूला को डिपो मिला। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, महेंद्रगढ़, झज्जर को छोड़कर पंचकूला से लगभग सभी जिलों के लिए बसों का संचालन किया जाता है, जो जिला बनने से पहले नहीं था। इसके अलावा इंटर स्टेट बसों का संचालन भी किया जा रहा है। इसके चलते पंचकूला से दिल्ली, हिमाचल, पंजाब, यूपी और उत्तराखंड के लिए बसें चलाई जा रही हैं।
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