करोड़ों के बैंक घोटाले में दो बैंक अधिकारी तीन दिन के रिमांड पर
सरकारी खातों में फर्जी मोबाइल नंबर दर्ज कर शेल कंपनियों तक पहुंचाई गई रकम, सीबीआई ने अदालत में रखे जांच के तथ्य
फर्जी दस्तावेजों और डेबिट ट्रांजेक्शन के जरिये करोड़ों रुपये के गबन की जांचसंवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा के सरकारी विभागों के बैंक खातों में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने सोमवार को देर रात दो बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को उन्हें अदालत में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है। एजेंसी के अनुसार सरकारी खातों में अधिकृत अधिकारियों के बजाय आरोपियों के नियंत्रण वाले मोबाइल नंबर दर्ज कर फर्जी लेन-देन को अंजाम दिया गया और सरकारी धन शेल कंपनियों तक पहुंचाया गया।
सीबीआई ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन एरिया हेड शमीम अहमद डार और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर चरणजीत सिंह रंधावा को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि दोनों अधिकारियों की भूमिका सरकारी खाते खुलवाने, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लेन-देन को मंजूरी देने और सरकारी धन को शेल कंपनियों तक पहुंचाने में सामने आई है। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
सरकारी खातों में दर्ज किए गए आरोपियों के मोबाइल नंबर
सीबीआई के अनुसार जांच में सामने आया कि सरकारी विभागों के नाम पर खाते खोलते समय केवाईसी और अन्य अनिवार्य प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। कई खातों में सरकारी अधिकारियों के बजाय आरोपियों के नियंत्रण वाले मोबाइल नंबर दर्ज किए गए, जिससे खातों से संबंधित डेबिट अलर्ट वास्तविक अधिकारियों तक पहुंचने के बजाय आरोपियों को मिलते रहे।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड खाते से जुड़े मिले 187 करोड़ के अलर्ट
सीबीआई ने अदालत को बताया कि शमीम अहमद डार उस समय आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के सरकारी बैंकिंग समूह में एरिया हेड था। जांच में पाया गया कि उन्होंने कई सरकारी विभागों के खाते खुलवाने और उन्हें प्रमाणित करने में अहम भूमिका निभाई। आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों और दस्तावेजों के सत्यापन का प्रमाण दिया जबकि बाद में वही खाते जाली दस्तावेजों और फर्जी मोबाइल नंबरों के आधार पर संचालित हुए। जांच में सामने आया कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खाते से जुड़े एक मोबाइल नंबर पर लगभग 187.26 करोड़ रुपये के 47 कथित फर्जी डेबिट अलर्ट पहुंचे जबकि वह नंबर विभाग का नहीं बल्कि सह-आरोपी के नियंत्रण में था।
पंचायत विभाग के खाते से 47.51 करोड़ के फर्जी डेबिट का आरोप
सीबीआई के मुताबिक एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर चरणजीत सिंह रंधावा ने भी कई संदिग्ध डेबिट ट्रांजैक्शन को मंजूरी दी। जांच में सामने आया कि पंचायत विभाग और एचपीजीसीएल कर्मचारी पेंशन फंड ट्रस्ट के खातों से जाली चेक और फर्जी डेबिट नोट्स के आधार पर रकम निकाली गई। एजेंसी का आरोप है कि पंचायत विभाग के खाते से करीब 47.51 करोड़ रुपये के फर्जी डेबिट में उनकी सीधी भूमिका रही। कई मामलों में कॉल-बैक सत्यापन की प्रक्रिया भी ऐसे मोबाइल नंबरों पर पूरी दिखाई गई, जो अधिकृत अधिकारियों के नहीं थे।
डिजिटल साक्ष्य और धन के ट्रेल की होगी जांच
सीबीआई के अनुसार दोनों आरोपियों ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी धन को शेल कंपनियों में ट्रांसफर कराने में भूमिका निभाई। तलाशी के दौरान कई दस्तावेज और निवेश संबंधी रिकॉर्ड भी बरामद किए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने पूछताछ में सहयोग नहीं किया और मोबाइल फोन से अहम चैट व कॉल रिकॉर्ड हटाने का प्रयास किया। सीबीआई ने अदालत में कहा कि रिमांड के दौरान डिजिटल साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड, धन के पूरे ट्रेल, शेल कंपनियों तक पहुंचे सरकारी फंड, कथित अवैध लाभ और मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाएगी। एजेंसी अन्य सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता की भी जांच कर रही है।