चंडीगढ़। दहेज व घरेलू हिंसा से जुड़े मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि वैवाहिक मामलों में अदालतों का अधिक संवेदनशील होना जरूरी है और केवल दहेज की रिकवरी न होने के आधार पर पति को जमानत से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
याचिका दाखिल करते हुए पटियाला निवासी पति ने बताया कि उसका विवाह 25 मई, 2022 को हुआ था और विवाह के बाद से ही लगातार उसकी पत्नी का बर्ताव उसके व परिवार के प्रति सही नहीं था। एक दिन उसकी पत्नी घर छोड़ कर चली गई और इसके बाद याची ने तलाक के लिए याचिका दाखिल कर दी। इस याचिका के बाद उसकी पत्नी ने 4 नवंबर, 2023 को याची के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवा दी।
याची की पत्नी ने आरोप लगाया है कि याची व उसके रिश्तेदार लगातार दहेज की मांग कर रहे थे और विवाह में मिले दहेज से खुश नहीं थे। इसी मामले में याची ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में अंतरिम जमानत मिलने के बाद याची ने कभी इसका दुरुपयोग नहीं किया। इसके साथ ही केवल दहेज की वस्तुओं की रिकवरी न होने के आधार पर याची को जमानत से इन्कार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला जघन्य अपराधों वाला नहीं है। वैवाहिक मामलों में वैसे भी अदालतों को संवेदनशील होने की जरूरत है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए पति को अग्रिम जमानत दे दी है।