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Punjab: विवाहिता की माैत के 24 साल बाद पति और सास दोषमुक्त करार, HC ने पलटा बरनाला कोर्ट का फैसला

Sat, 31 Aug 2024 05:54 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

बरनाला की महिला ने खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके पिता ने ससुरालियों पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया था। बरनाला कोर्ट की सात साल की सजा को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पत्नी की मौत के 24 साल बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पति और सास को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषमुक्त करार दिया है। हाईकोर्ट ने बरनाला की अदालत द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को रद्द करते हुए यह आदेश जारी किया है। 
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याचिका दाखिल करते हुए विनोद कुमार, उसके पिता रमेश कुमार व मां सावित्री देवी ने बरनाला की अदालत द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी करार देने के फैसले को चुनौती दी थी। इस मामले में मृतका के पिता शिकायतकर्ता थे और उन्होंने बताया था कि विवाह के बाद से ही लगातार दहेज के लिए दबाव बनाया जा रहा था। ससुराल वाले पहले स्कूटर और फिर कार की मांग कर रहे थे। जब मृतका के बेटे का जन्म हुआ तो शिकायतकर्ता ने डिलीवरी का पूरा खर्च उठाया और शगुन में 11000 रुपये भी दिए थे।

महिला ने खुद पर तेल छिड़ककर लगा ली थी आग

मृतका के बेटे के जन्मदिन पर भी महंगा तोहफा न मिलने के चलते शिकायतकर्ता की बेटी को प्रताड़ित किया गया। इस प्रताड़ना से दुखी होकर शिकायतकर्ता की बेटी ने खुद पर तेल छिड़क कर आत्महत्या कर ली। ट्रायल कोर्ट ने पति, सास और ससुर को दोषी मान 7 साल की सजा सुनाई थी। इस आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका में बताया गया कि अदालत ने तथ्यों को नजरअंदाज कर याचिकाकर्ताओं को दोषी करार देकर सजा सुनाई है।

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि जब पीड़िता ने खुद पर तेल छिड़क कर आग लगाई तो उस समय पति घर पर मौजूद नहीं था। सास अस्पताल में अपना इलाज करवा रही थी और पीड़िता घर में अकेली थी। पीड़िता का तनाव का इलाज चल रहा था और वह लगातार दवा ले रही थी। 
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पीड़िता के पिता और इस मामले के शिकायतकर्ता ने दहेज की मांग को लेकर जो आरोप लगाए हैं वह विश्वसनीय नहीं हैं। साथ ही उन्होंने कहीं भी यह नहीं कहा कि याचिकाकर्ताओं ने इस इरादे से कोई हरकत की है कि पीड़िता आत्महत्या कर ले। ऐसे में अभियोजन इस मामले में याचिकाकर्ताओं पर आरोप साबित करने में विफल रहा। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने अपील मंजूर करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है।
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