पंचकूला। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने बुधवार को अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर सैकड़ों लोगों को बेघर कर दिया। विभाग की अतिक्रमण हटाओ टीम ने एसडीओ एमपी शर्मा के नेतृत्व में सेक्टर-20, सेक्टर-25 और एमडीसी सेक्टर-2 में बनी सैकड़ों झुग्गियों को गिरा दिया। इस दौरान झुग्गियों में रहने वाले लोग अधिकारियों के आगे गिड़गिड़ाते रहे लेकिन किसी ने उनकी एक नहीं सुनी। हालांकि कुछ लोगों ने रोष भी जताया लेकिन विभाग की कार्रवाई जारी रही।
झुग्गियों में रहने वाले लोगों का कहना था कि एक तरफ तो हरियाणा सरकार दूसरे राज्यों से मजदूरों को लाने की कोशिश कर रही है। वहीं दूसरी तरफ जो लोग परिवार के साथ यहां किसी तरह अपना बसर कर रहे हैं, उन्हें उजाड़ रही है। सेक्टर-25 निवासी मनोज कुमार ने कहा कि सरकार प्रत्येक मजदूर पर 1500 रुपये खर्च देने का दावा कर रही है। लेकिन इस समय ऐसी कार्रवाई कहां तक उचित है। राम स्वरूप ने कहा कि वह परिवार के साथ झुग्गी में रहते थे और दिन में दिहाड़ी करके परिवार का पालन कर रहे थे, लेकिन अब वे कहां जाएं, कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। कृष्ण कुमार ने कहा कि यदि सरकार को झुग्गी तोड़नी ही थी तो कम से कम कुछ दिन का समय देना चाहिए था ताकि वह सामान के साथ किसी दूसरी जगह चले जाते। गर्मी के मौसम में परिवार के साथ कहां जाएंगे क्योंकि अभी न तो बस चल रही है और न ही ट्रेन का ही संचालन हो रहा है।
इस बारे में ममता शर्मा, ईओ एचएसवीपी ने कहा कि शहर में दिन प्रतिदिन अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। इसकी लगातार शिकायतें मिल रही हैं। लोगों की परेशानी को दूर करने के लिए ही कार्रवाई शुरू की गई है।
इस बारे में ज्ञानचंद गुप्ता, विधानसभा स्पीकर हरियाणा ने कहा कि शहर की सुंदरता को बरकार रखने के लिए अतिक्रमण को हटाया जा रहा है। झुग्गियां लगातार बढ़ रही हैं और ये लोग कोरोना को भी बढ़ावा दे रहे हैं। मानवता को प्रमुख रखते हुए इस कार्रवाई को कुछ माह रोकने के लिए अधिकारियों से बात करूंगा ताकि कोरोना काल में किसी को परेशानी का सामना न करना पड़े।
कोरोना काल में ऐसी कार्रवाई निंदनीय : रंजीता
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता रंजीता मेहता ने कोरोना काल में इस तरह की कार्रवाई निंदनीय है। वह अतिक्रमण की पक्षधर नहीं हैं लेकिन सरकार और अधिकारियों को मानवता को प्रमुख रखते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। फुटपाथ किनारे बैठे लोगों पर तो कार्रवाई कुछ हद तक ठीक है लेकिन किसी गरीब की झुग्गी तोड़कर उसे बेघर कर देना गलत है। यदि झुग्गियों को हटाना ही है तो कम से कम छह महीने बाद ये कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि अभी तो ये लोग रोजी-रोटी के लिए तरस रहे हैं।