पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के मुख्य प्रशासक से पूछा है कि आखिर किस नियम के तहत मनसा देवी कांपलेक्स में मौजूद हरियाणा गवर्नमेंट ऑफिसर ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में आईएएस, आईपीएस और जजों को फ्लैट की अलॉटमेंट की गई है।
हाईकोर्ट ने इसके साथ ही मुख्य प्रशासक से पूछा है कि जब यह सोसाइटी हरियाणा के कर्मचारियों के लिए थी तो क्या किसी नियम के तहत जज, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को इसमें सदस्य बनाया जा सकता था। कोर्ट ने पूछा कि क्या किसी के परिवार के पास पहले प्लाट या एचएसवीपी का फ्लैट है तो क्यों वो इस सोसाइटी के लिए मेेंबर बन सकता है।
अगर किसी को प्लाट या एचएसवीपी का फ्लैट अलाट को गया है तो क्या इसे वापस लिया जा सकता है यदि हां तो उसका नियम क्या है। कोर्ट ने इस तरह के कुछ और सवाल के जवाब देने के लिए मुख्य प्रशासक को छह सप्ताह का समय दिया है। इस मामले में हाईकोर्ट को बताया गया था कि पंचकूला में मौजूद सोसाइटी में अलॉटमेंट मनमाने तरीके से की गई है।
याची ने कहा कि हरियाणा सरकार ने 2001 में ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के लिए मनसा देवी कांप्लेक्स में भूमि दी थी। यह हरियाणा सरकार के अधिकारियों के लिए दी गई थी और इसका नाम हरियाणा गवर्नमेंट ऑफिसर ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी था। याची ने कहा कि आईएएस और आईपीएस अधिकारी राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं होते बल्कि केंद्र सरकार के कर्मचारी होते हैं।
ऐसे में उन्हें इस सोसायटी में अलॉटमेंट की ही नहीं जा सकती। वहीं याची ने यह भी बताया कि नियम के अनुसार जिस व्यक्ति को हरियाणा में किसी एक ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में प्लॉट या फ्लैट की अलॉटमेंट हो चुकी हो उसे दूसरी अलॉटमेंट नहीं की जा सकती है।
याची ने हाईकोर्ट में 40 ऐसे आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम की सूची सौंपी है जो इस सोसाइटी के मेंबर है और उनके पास अन्य सोसाइटी में भी प्लाट या फ्लैट मौजूद हैं। याची ने कहा कि अधिकारियों ने अपनेे रुतबे का इस्तेमाल करते हुए यह सब मैनेज किया है और ऐसे में उनकी अलॉटमेंट गलत है और इसे खारिज किया जाना चाहिए।