चंडीगढ़। रसूखदारों को पुलिस सुरक्षा के बारे में मांगी गई जानकारी न देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब व हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने अब हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को 24 घंटे की मोहलत देते हुए हर हाल में यह जानकारी मंगलवार को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि यह जानकारी नहीं आई तो अधिकारी अवमानना की कार्रवाई के लिए तैयार रहें। 2019 में एक आपराधिक मामले में एक गवाह को सुरक्षा दी गई थी, अभी तक इस मामले में केवल एक गवाही हुई थी। एक गवाह को खतरे के चलते कई साल से सुरक्षा जारी रखी गई थी। इस मामले का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई आरंभ की है। 16 मई को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के डीजीपी को विस्तृत जानकारी सौंपने का आदेश दिया था। कोर्ट ने पूछा है कि प्रदेश में कितने वीआईपी लोगों को सुरक्षा दी गई है और उनकी सुरक्षा में किस रैंक के कितने अधिकारी तैनात हैं। प्रत्येक की सुरक्षा का सरकारों व प्रशासन पर कितना वित्तीय बोझ पड़ रहा है। इन लोगों को सुरक्षा देने के लिए क्या आधार बनाया गया है और क्या इनमें से कोई सुरक्षा के लिए भुगतान कर रहा है। हाईकोर्ट ने कहा था कि पुलिस सुरक्षा लेना समाज में प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। ऐसी झूठी शान और प्रतिष्ठा जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से बनाए रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
सोमवार को पंजाब सरकार को स्थिति स्पष्ट करने को कहा कि 11 दिन पहले दिए गए आदेशों की पालना क्यों नहीं हुआ और क्यों न डीजीपी को जवाब देने के लिए कोर्ट में पेश होने के आदेश पारित कर दिए जाए। पंजाब सरकार ने कहा कि चुनावी माहौल में राज्य में वीवीआईपी मूवमेंट है, आगामी दिनों प्रधानमंत्री का दौरा है इसलिए डीजीपी को राज्य में रहना अनिवार्य है। पंजाब सकरार ने इस मामले में समय देने की अपील की जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इस पर सरकार ने कोर्ट को विश्वास दिलाया कि यह ब्योरा मंगलवार को दोपहर तक सौंप दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई मंगलवार तक स्थगित करते हुए हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को यह ब्योरा सौंपने का आदेश दिया है।