अमृतसर के गुरु नानक देव हॉस्पिटल द्वारा कोरोना पॉजिटिव मरीज प्रीतम सिंह की मौत की जानकारी देते हुए उसके घर किसी अन्य महिला का शव भेजे जाने का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब सरकार सहित अन्य सभी प्रतिवादी पक्षों को 22 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर पुरे मामले में जवाब दिए जाने के आदेश दे दिए हैं।
जस्टिस विवेक पूरी ने यह नोटिस इस मामले को लेकर मृतक प्रीतम सिंह के बेटों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। मृतक के बेटों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि मुकेरियां निवासी प्रीतम सिंह जो उनके पिता हैं 1 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद 2 जुलाई को उन्हें होशियापुर के रयात एंड बाहरा यूनिवर्सिटी में बने कोरोना आइसोलेशन सेंटर में एडमिट करवाया गया था।
5 जुलाई को उन्हें अमृतसर के गुरु नानक देव हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया।18 जुलाई को उन्हें मैसेज मिला कि उनके पिता की 17 जुलाई रात 11 बजे मौत हो गई है। जब उनके पिता के शव को मुकेरियां भेजा गया तो वहां पता चला कि शव उनके पिता का नहीं बल्कि किसी महिला का था। इसका खुलासा होने के बाद महिला का शव मुकेरियां की मोर्चरी में शिफ्ट कर दिया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि उनके पिता जीवित हैं क्योंकि कोरोना के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत शव का संस्कार करने से पहले मृतक के रिश्तेदारों को मृतक का चेहरा दिखाना होता है। उन्हें उम्मीद है कि अभी उनके पिता जीवित हैं और अभी हॉस्पिटल में ही हैं।
लेकिन उनके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जा रही है, लिहाजा अब उन्हें पेश किए जाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी गई है। हाईकोर्ट ने मामले में सभी प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।