मच्छर जनित रोग की रोकथाम के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा नोटिस और चलान की कार्यवाही की जाती है।
लेकिन, पिछले दो साल से यह सिर्फ और सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। विभाग का दावा था कि अगस्त-2013 के अंतिम सप्ताह में टीम लोगों के घरों और प्लाटों की जांच शुरू कर देगी।
अब मलेरिया का सीजन बीत चुका है और डेंगू सीजन भी गुजरने वाला है, लेकिन अभी तक विभाग का प्लान ठंडे बस्ते में है।
यह हालत तब है, जबकि इस साल जिले में डेंगू 26 से अधिक मरीज मिल चुके हैं और एक मौत भी हो चुकी है।
अमर उजाला से बात चीत के दौरान सिविल सर्जन ने जानकारी नहीं होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया, जबकि इसकी जिम्मेदारी उन्हीं की होती है।
सूत्रों के अनुसार बाइलाज मलेरिया डायरेक्टर कार्यालय से मच्छर जनित रोग की रोकथाम और लोगों को जागरूक करने के लिए चलान और नोटिस की कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।
अभियान के तहत विभाग अर्बन और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के घरों और प्लॉटों में डेंगू या मलेरिया के लारवा पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग नोटिस देगा।
इसके साथ ही इनकी रोकथाम के लिए चिह्नित स्थानों पर विभाग छिड़काव भी करवाएगा। नोटिस के बाद भी यदि उसी स्थान पर डेंगू के लारवा पाए जाते हैं, तो विभाग नगर निगम की मदद से दोषी का 200 से तीन हजार रुपये तक का चलान करवा सकता है।
नियम के अनुसार चंडीगढ़ और दिल्ली में लारवा पाए जाने पर वहां के लोगों को नोटिस देने के साथ ही चलान भी किए जा रहे हैं।
अर्बन और रूरल एरिया में विभाग की ओर से अगस्त के अंतिम सप्ताह में अभियान चलाने के बारे में हमारे पास कोई सूचना नहीं है।
डॉ. वीके बंसल, सिविल सर्जन, सेक्टर 6 जनरल अस्पताल पंचकूला