भारत से दूसरे देशों में जाने वाली इस तरह की आइटम के लिए आपातकालीन चेक रखने की जरूरत है। पिछले छह साल की ट्रांजेक्शन की भी जांच होनी चाहिए। इस तरह की ऑक्शन रोकने के लिए दूसरे देशों के साथ कूटनीतिक विकल्पों का इस्तेमाल भी होना चाहिए। भारत सरकार को यूके, यूएसए और फ्रांस की जांच एजेंसियों को भी शिकायत करनी चाहिए।
इस बार 6 फर्नीचर हुए नीलाम
पियरे जेनरे चंडीगढ़ के फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए के साथ काम करते थे। इसी कारण ली कार्बूजिए ने चंडीगढ़ में घरों, सड़कों और पार्कों की प्लानिंग से लेकर सरकारी दफ्तरों में रखी जाने वाली कुर्सियों, मेज आदि को लेकर भी यूनिक स्टाइल के डिजाइन की जिम्मेदारी पियरे जेनरे को दी थी।
पेरिस के इस ऑक्शन हाउस में इस बार 6 फर्नीचर नीलामी के लिए रखे गए थे और इस बोली में लगी कीमत ही इस हेरिटेज फर्नीचर के महत्व की कहानी बयां करती है। गौरतलब है कि पेरिस में पहले भी कई बार चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी हो चुकी है।
चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर विदेश पहुंच कैसे रहा है, यह बड़ा सवाल है लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि हेरिटेज फर्नीचर विदेश तक कब और कैसे पहुंचा है। कौन लोग हैं, जो चंडीगढ़ के फर्नीचर को विदेश में ले जाकर करोड़ों में बेच रहे हैं। पहले भी विदेश में कई बार चंडीगढ़ का हेरिटेज सामान नीलाम हुआ है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा है।
स्पेन में नीलाम हुआ पियरे जेनरे का साइन किया हुआ लेटर
31 अक्टूबर को स्पेन में वर्ष 1964 के चंडीगढ़ के तत्कालीन चीफ आर्किटेक्ट एंड टाउन प्लानिंग एडवाइजर पियरे जेनरे के साइन किए हुए एक पत्र की नीलामी की गई। बोली लगाकर इस पत्र को 340 यूरो (37 हजार 975 रुपये) में बेचा गया। यह पत्र पियरे जेनरे ने 18 जुलाई 1964 को कोलकाता में एक पत्रकार संतोष घोष को लिखा था। इस पत्र पर पियरे जेनरे के हस्ताक्षर भी हैं, जिसकी स्पेन में ‘ऑटोग्राफ ऑक्शन’ में नीलामी की गई।
ये फर्नीचर हुए नीलाम
| फर्नीचर |
कीमत |
| आर्म चेयर |
10 लाख 67 हजार |
| रीडिंग टेबल |
89 लाख |
| कंगारू चेयर |
29 लाख 64 हजार |
| लकड़ी का डेस्क |
6 लाख |
| पीजे सोफा |
14 लाख 23 हजार |
| कुर्सियों का जोड़ा |
11 लाख |