चंडीगढ़। आईजी होमगार्ड वाई पूरण कुमार द्वारा डीजीपी पर एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान केस फाइल न आने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 12 जुलाई तक टाल दी है। इस दौरान हरियाणा सरकार की ओर से प्राथमिक जांच से जुड़ा रिकार्ड भी कोर्ट में सौंप दिया गया।
डीएसपी राम कुमार ने जांच में पाया कि याची द्वारा लगाए आरोप एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आते हैं। साथ ही उन्हाेंने डीजीपी व आईजी दोनों से जवाब मांगे थे। डीजीपी ने अपना जवाब सौंप दिया, लेकिन कुमार ने जवाब नहीं दिया। इस आधार पर शिकायत को ही उनका बयान माना गया।
याची का आरोप है कि उन्हाेंने डीजीपी के खिलाफ एसपी अंबाला को लिखित शिकायत दी थी। अनुसूचित जाति से होने के चलते डीजीपी उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं, जो एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए डीजीपी पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। शिकायत के बावजूद अंबाला के पुलिस अधीक्षक ने बिना एफआईआर दर्ज किए प्राथमिक जांच का फैसला लिया और इसे डीएसपी को सौंप दिया।
यह था मामला
वाई पूरण कुमार के अनुसार 2020 में शहजादपुर ट्रैफिक थाने में जब शिवलिंग स्थापना को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था और वह उस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में शामिल होने के चलते ही डीजीपी ने उनसे जवाब तलब किया था। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वह अनुसूचित वर्ग से हैं। उनका आरोप है कि वहां एक अन्य आईपीएस भी शामिल हुए थे, जिससे डीजीपी ने जवाब तलब नहीं किया।