हरियाणा के सरकारी विभागों में चल रहे करोड़ों के घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। दस जुलाई 2025 को हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल ने घोटाले की पटकथा लिखी थी।
हरियाणा के सरकारी विभागों में चल रहे करोड़ों के घोटाले में जांच के दौरान सामने आया है कि सरकारी खजाने से 10 करोड़ रुपये की बड़ी रकम एक कैंसिल चेक का इस्तेमाल करके निकाली गई थी। एजेंसी ने धोखाधड़ी को एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा बताया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा खोले गए अन्य बैंक खातों में भी संदिग्ध और अनाधिकृत लेनदेन की पहचान की गई है, जिनके तार सीधे इस घोटाले से जुड़े हो सकते हैं। इसमें उन बैंक खातों की भी जांच सीबीआई कर रही है।
इस मामले में पहले ही 13 आरोपियों और दो फर्मों के खिलाफ फाइनल रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच एजेंसी अब प्रशासनिक तंत्र के ऊपरी स्तरों तक पहुंच चुकी है। सरकारी धन से खरीदी गई संपत्तियों और सोने की बरामदगी के लिए की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कई रसूखदार चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं, जो इस घोटाले में परोक्ष रूप से शामिल रहे हैं।
पैसा जमा होने के बाद असली खेल शुरू हुआ। जांच में सामने आया है कि इस खाते से 101 फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन किए गए, जिनके जरिए कुल 182.93 करोड़ रुपये निकाले गए। यह निकासी मुख्य रूप से तब हुई जब पंकज अग्रवाल स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव थे। मामले पर पर्दा डालने और खातों में बैलेंस दिखाने के लिए हेराफेरी भी की गई। 33 फर्जी क्रेडिट ट्रांजेक्शन के जरिए खाते में 132.39 करोड़ रुपये वापस जमा भी दिखाए गए। वहीं जमा और निकासी के इस पूरे गोरखधंधे के बाद, सरकारी खजाने को 50.54 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ। यानी यह वह शुद्ध रकम है जो घोटालेबाजों की जेब में चली गई।