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ठंडे बस्ते में हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक प्रकोष्ठ का गठन

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चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित किया जाने वाला भ्रष्टाचार निरोधक प्रकोष्ठ ठंडे बस्ते में चला गया है। सीएम के आठ माह पहले घोषणा करने के बावजूद प्रकोष्ठ आज तक गठित नहीं हुआ। घोषणा के बाद शुरुआती 38 दिन में स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को भ्रष्टाचार की 2963 शिकायतें तो मिली, लेकिन एफआईआर एक मामले में भी दर्ज नहीं हुई।
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आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी सामने आई है। आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने सीएम कार्यालय में आरटीआई डालकर भ्रष्टाचार निरोधक प्रकोष्ठ के गठन की अधिसूचना की कॉपी, प्राप्त सभी शिकायतों की जानकारी व उनकी स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। जवाब में मुख्य सचिव कार्यालय की चौकसी शाखा के जनसूचना अधिकारी राकेश शर्मा ने स्वीकार किया है कि सीएम सचिवालय में अभी तक भ्रष्टाचार निरोधक प्रकोष्ठ गठित नहीं हुआ। इसका गठन विचाराधीन है।
पीपी कपूर ने कहा कि राज्य चौकसी ब्यूरो (मुख्यालय) के डीएसपी एवं जनसूचना अधिकारी के पत्र अनुसार 9 दिसंबर 2019 से 15 जनवरी 2020 तक स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के पास भ्रष्टाचार की 2963 शिकायतें आईं। इनमें से किसी पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। व्हाट्सएप नंबर 94178-91064 पर 2508, टॉल फ्री नंबर 1800-180-2022 पर 300 व ईमेल से 155 शिकायतों सहित कुल 2963 प्राप्त हुई। इनमें से राज्य चौकसी ब्यूरो से संबंधित 79 शिकायतों पर कार्रवाई अभी प्रक्रिया में है।
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ये होना था प्रकोष्ठ से फायदा
9 दिसंबर 2019 को सीएम मनोहर लाल ने पंचकूला में हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक प्रकोष्ठ, सीएम सचिवालय में गठित करने की घोषणा की थी। प्रकोष्ठ गठित होने पर कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायत ऑडियो या वीडियो में प्रमाण सहित भेज सकेगा। हर शिकायत पर प्रकोष्ठ तुरंत जांच करेगा। शिकायतकर्ता की जानकारी को पूर्णतया गुप्त रखा जाएगा। शिकायत सही पाए जाने पर शिकायतकर्ता को उसकी इच्छानुसार किसी सार्वजनिक स्थल या उसके घर पर पुरस्कृत एवं सम्मानित करने का भी प्रावधान है। प्रकोष्ठ गठित न होने से योजना अभी कागजों में ही है।
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