इतना ही नहीं, शिअद ने पहले तो राज्य सरकार के संशोधन विधेयकों के हक में खुलकर वोट दिया और अब इन्हें नकार रहे हैं। कैप्टन ने आगे कहा कि शिअद द्वारा पंजाब और इसके किसानों से जुड़े इतने गंभीर मसले संबंधी बार-बार यू-टर्न लेना यह साबित करता है कि वह अपने राजनैतिक हितों को साधने के लिए शैतान के साथ भी हाथ मिलाने से परहेज नहीं करेंगे।
कैप्टन ने आगे कहा कि इस सबके बावजूद क्या सुखबीर यह आशा करते हैं कि किसान उनके दावों पर विश्वास करेंगे। उन्होंने सुखबीर को चुनौती देते हुए कहा कि शिअद अध्यक्ष एक वजह बताएं कि क्यों पंजाब के लोग खासकर किसान उनकी पार्टी पर भरोसा करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत ही शर्मनाक बात है कि बादल परिवार अपने संकुचित हितों की रक्षा के लिए इस हद तक गिर गया है। मुख्यमंत्री ने सुखबीर का यह तर्क रद्द कर दिया कि अकालियों को राज्य सरकार के संशोधन विधेयकों को ठीक तरह से पढ़ने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यह संभव ही नहीं हो सकता जबकि अकालियों के पास बड़े स्तर पर कानूनी मामलों के जानकार मौजूद हैं।