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Panchkula News: लोगों को आकर्षित कर रहे हाथ के बने लोहे के बर्तन फतेहाबाद की सुनीता देवी के स्टॉल पर लगती है भीड़

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सरसों मेले में लोहे का सामान बेचतीं सुनीता
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संघर्ष : खुद की मेहनत और हिम्मत से खड़ा किया कारोबार, आज हैं आत्मनिर्भर
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। कहते हैं, काम कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता, अगर हिम्मत और लगन सच्ची हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इस कहावत को सच साबित कर रही हैं सुनीता देवी। वह दस वर्षों से सरस मेलों में हाथ से बनाए लोहे के बर्तन बेच रही हैं।
उनकी दुकान पर कड़ाही, तवा, चिमटा, सिल-बट्टा, तंदूर का चिमटा जैसे तमाम बर्तन मिलते हैं जो पूरी तरह से हाथ से बनाए जाते हैं और अपने आकर्षण व मजबूती के लिए प्रसिद्ध हैं।
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आर्थिक संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक का सफर
सुनीता देवी बताती हैं कि शुरुआत में उनके लिए यह काम आसान नहीं था। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। एक छोटे व्यवसाय के लिए मिशन से लोन लेकर अपनी दुकान की शुरुआत की। शुरुआत में लोग इस काम को देखकर हैरान होते थे लेकिन उनकी मेहनत ने धीरे-धीरे रंग दिखाया। आज उनकी स्टाल पर भीड़ लगती है और दूर-दूर से लोग उनके बर्तनों को खरीदने आते हैं। सुनीता कहती हैं कि यह काम छोटा नहीं था। मेहनत करती गई और आज अपने पैरों पर खड़ी हूं। परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई सब मैं खुद संभाल रही हूं। यही मेरी सबसे बड़ी जीत है।
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महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का मंच
सुनीता के अनुसार सरस मेला न केवल उनके लिए बल्कि सैकड़ों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। यहां महिलाएं अपनी कला, उत्पाद और मेहनत को बाजार तक पहुंचाती हैं और इसके माध्यम से व्यवसाय स्थापित करती हैं।
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