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Panchkula News: गुरु तेग बहादुर जी ने जमीन खरीद कर बसाई थी आध्यात्मिक नगरी

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श्री आनंदपुर साहिब/चंडीगढ़। विधानसभा सत्र के दौरान शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस ने सभी लोगों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए नौवें गुरु साहिब जी के बेमिसाल और सबसे बड़े बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए एक आधिकारिक प्रस्ताव पेश किया।
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यह प्रस्ताव पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ। सदन में उन्होंने गुरु साहिब के समर्पित सिखों भाई मति दास, भाई सती दास और भाई दयाला जी को भी याद किया। उन्होंने गुरु की शहादत के गहरे और हमेशा रहने वाले राष्ट्रीय महत्व को बताया।

सदन ने बताया गया कि आनंदपुर साहिब की यह पवित्र मिट्टी, जिसे श्री गुरु तेग बहादुर जी ने खुद खरीदा और बसाया था और अपनी पूज्य माता के नाम पर इसका नाम चक नानकी रखा। यह वही जमीन है जहां से गुरु साहिब ने दिल्ली के लिए अपनी आखिरी यात्रा शुरू की थी। यहीं पर कश्मीर पंडित इंसाफ की गुहार लेकर गुरु साहिब के पास आए थे।
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हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान ने भारत के सेक्युलर ताने-बाने को आकार दिया। अगर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने धर्म और आस्था की रक्षा के लिए अपनी जान न दी होती, तो हमारे देश का नक्शा और सेक्युलर ताना-बाना अलग होता। दुनिया के इतिहास में अलग-अलग धर्मों के बीच मेलजोल और नेक हिम्मत की इससे बड़ी मिसाल नहीं मिलती।

उन्होंने कहा कि यह वह जमीन है जहां भाई जैता (बाबा जीवन सिंह) पूरी श्रद्धा के साथ श्री गुरु तेग बहादुर जी के शीश को लाए थे और जहां दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने उन्हें गले लगाते हुए कहा था, रंगरेटे गुरु के बेटे। आप हमारे पिता का सिर लाए हैं आप हमारा सूरज लाए हैं।
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