चंडीगढ़ के जीआरपी थाने में मुलाजिमों की कमी नहीं हैं। 40 पद होने के बावजूद अभी 30 कर्मचारी मौजूद हैं। इस कारण यहां काम प्रभावित हो रहे हैं। मुलाजिमों की कमी के कारण थाने में संत्री पोस्ट पर कोई तैनात नहीं रहता है। इस कारण मुलाजिमों की कमी के कारण हाल ही में नाबालिग से प्रेम संबंध के कारण हुई हत्या के मामले में जीआरपी अब तक आरोपियों का सुराग मिलने के बाद भी उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
आरोपियों का लोकेशन बदायूं (यूपी) मिलने के बाद भी पुलिस वहां नहीं गई, क्योंकि उनके पास पर्याप्त स्टाफ और साधन नहीं हैं। जीआरपी एसएचओ उर्मिला खुद यह स्वीकार करती हैं। अब आरोपियों के नंबर बंद हैं, इसलिए पुलिस ने भी प्रयास करना छोड़ दिया है।
थाने की सुरक्षा पर भी सवाल
चंडीगढ़ जीआरपी थाने की सुरक्षा राम भरोसे है। यह ट्राइसिटी का इकलौता थाना है जहां पर चारदीवारी नहीं है। थाने के आसपास चारों तरफ जंगल फैला है। यहां के मुलाजिमों को सांप और बिच्छू का खतरा बना रहता है। सेवा, सुरक्षा, सहयोग का नारा लगाने वाली पुलिस खुद सुरक्षित नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जीआरपी पुलिस स्टेशन पर आने वाले यात्रियों की सुरक्षा कैसे करेगी।
थाने का इंटरनेट बंद तो ये सिस्टम पूरा फेल
ऑनलाइन शिकायतें
आनलाइन गुमशुदगी रिपोर्ट
मेल के जरिए मिलने वाली सूचनाएं
थाने से लेकर एसएचओ का निवास स्थान तक बदहाल
चंडीगढ़ जीआरपी थाने की बदहाली का सबूत यहां की दीवारों में पड़ी दरारें और दीवारों से रिसता पानी है। हैरत की बात है कि इस थाने में एचएचओ का निवास स्थान भी बदहाल है। दीवारें टूट हुई हैं। कभी भी गिर सकती हैं।
पर्याप्त मुलाजिम नहीं हैं हमारे पास: जीआरपी एसएसओ
जीआरपी एसएचओ उर्मिला ने बताया कि उनके पास पर्याप्त मुलाजिम नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में हुए मर्डर मामले के आरोपियों का लोकेशन बदायूं (उत्तर प्रदेश) ट्रेस हुआ, लेकिन अब मोबाइल बंद हैं। उन्होंने कहा कि मुलाजिम की कमी और साधन कम होने के कारण आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए जीआरपी पुलिस वहां नहीं जा पाई है।
तैनात मुलाजिमों का ब्योरा
- आठ मुलाजिमों की ड्यूटी दो शिफ्टों में
- एक शिफ्ट में थाने में सात से आठ मुलाजिमों की ड्यूटी
- थाने के दायरे में ट्राइसिटी रेलवे का 23 किमी इलाका