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Panchkula News: हर साल तीन फीट नीचे गिर रहा भू-जल स्तर, अगर ऐसी ही हालत रही तो बढ़ेगी पानी की किल्लत

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पंचकूला। शहर में भूमिगत जल भंडारों का दोहन बेलगाम हो चुका है। वर्तमान में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के लिए भू-जल का दोहन रोकना चुनौती है। यहां का जल स्तर दो भागों में बंटा हुआ है। एमडीसी एरिया का जल स्तर 500 से 600 फीट नीचे और पूरे पंचकूला का 400 से 500 फीट नीचे चला गया है। एक हजार फीट से नीचे पंचकूला में पानी ही नहीं है। अगर समय रहते सरकार और प्रशासन ने भूजल को बचाने की कोशिश नहीं की तो 2032 तक पेयजल एक गंभीर समस्या बनकर उभरेगी। वर्तमान में पंचकूला को कजौली से 45 एमएलडी पानी मिल रहा है। जबकि जरूरत 170 एमएलडी की है। यहां मई और जून के महीने में पानी की खपत 200 एमएलडी पहुंच जाता है। बाकी 155 एमएलडी पानी की जरूरत पुरी करने के लिए एचएसवीपी 210 ट्यूबवेल चलाकर जमीनी पानी का दोहन कर कर रहा है।
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10 ट्यूबवेल दे चुके जवाब, कौशल्या से भी नहीं मिल रहा 45 एमएलडी पानी
साल-1979-80 में हरियाणा शहरी विकास ने सेक्टर-21 में ट्यूबवेल लगाया था। उस समय 80 से 100 फीट पर पेयजल मिल जाता था, लेकिन चार दशक बाद भू-जल स्तर पंचकूला एमडीसी एरिया का 500 से 600 फीट तक पहुंच गया है, जो आने वाले समय में जल संकट का संदेश है। हालात ऐसे बन गए हैं, घग्गर पार के ट्यूबवेल देने लगे जवाब देने लगे हैं। अबतक करीब 10 ट्यूबवेल जवाब दे चुके हैं। बता दें कि कौशल्या डैम से 45 और भाखड़ा से 45 एमएलडी पानी पंचकूला को मिलता है। वहीं, बारिश होने पर कौशल्या डैम से साल में छह माह ही पानी मिलता है, लेकिन पिछले दो तीन साल से पानी की पाइप लाइन टूटने के चलते 45 एमएलडी पानी भी कौशल्या डैम से नहीं मिल पा रहा है। इसका टेंडर हो चुका है। अभी पाइपलाइन जोड़ने में समय लगेगा।
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