कालका। कोरोना को लेकर हर जगह सफाई और सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ मार्केट में न जाने कहां से पंतग और मांझा आ रहा है जिसका इस समय क्रेज बढ़ गया है।
कालका की अगर बात करें तो सैकड़ों पतंगें आसमान में नजर आ रही हैं। शहर के गिने चुने इलाकों में चोरी छिपे पतंगों की खूब बिक्री हो रही है। एक तो इसमें न कोई सुरक्षा की व्यवस्था है न ही कहां से आई हैं पतंगे इसकी जानकारी किसी को है।
जबकि कोरोना बीमारी किसी भी चीज से फैल सकती है। ये सबको पता है लेकिन इसके बाद भी कुछ जगहों पर लोग लापरवाही कर रहे हैं।
पतंगों को नहीं कर सकते सैनिटाइज, आसानी से पहुंच सकता है वायरस
आसमान में उड़ती पतंग संक्रमण फैला सकती हैं। गंभीर सवाल यह है कि पतंग, मांझा व सद्दी को सैनिटाइज नहीं किया जा सकता है। ऐसे में पतंग को छूने व पतंग की कन्नी बांधने के दौरान हम कई बार पतंग को छूते हैं। जब कोई शख्स पतंग के जरिए पेंच लड़ाता है तो यह कटी पतंग किसी के घर या छत पर पहुंचती है। जिससे वायरस दूसरों तक बहुत आसानी से पहुंच सकता है। गंभीर सवाल यह है कि जो लोग होम क्वारंटीन में रखे गए हैं अगर उन्होंने पतंग उड़ाई, पेंच लड़ाया और पतंग कट कर दूसरों के घर में पहुंची तो उसके क्या नतीजे होंगे। इन पतंगों को सैनिटाइज किया जाना मुमकिन नहीं है। मांझा व सद्दी सैनिटाइज नहीं हो सकते। ऐसे में यह पतंगें लुत्फ से ज्यादा बड़ी सजा बन सकती हैं।
धारा 144 लागू, खालीपन दूर करने के लिए पतंग का सहारा
कोरोना वायरस से बचने के लिए जमीन पर लॉकडाउन और दफा 144 लागू है। इस कारण लोग घर में खाली हैं और इस खालीपन को दूर करने के लिए पतंगों का सहारा ले रहे हैं। शहर के विभिन्न मोहल्लों के घरों की छतों पर आसमानों में दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक पतंगें उड़ती नजर आ रही हैं। कटी पतंगों को बच्चे लूट भी रहे हैं। वहीं कटी हुई पतंगें घरों व छतों पर पहुंच रही हैं। पतंग उड़ाने का क्रेज बढ़ने की वजह से पतंग और मांझे के मूल्य में दोगुना से चार गुना तक का इजाफा हो गया है। शहर में तमाम जगहों पर मौजूद पतंगों की दुकानें बंद हैं लेकिन पतंगों की बिक्री घरों से हो रही है।