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हरियाणा: राज्यपाल बोले- नियमों से चलूंगा, प्रदेश सरकार छोटे विषयों में अध्यादेश न लाए

Sun, 12 Sep 2021 01:56 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि सरकार का अपना सिस्टम होता है। उनका काम परिपूरक सरकार के तौर पर कार्य करना है। उनकी प्राथमिकताओं को साकार करने का काम सरकार ही करेगी। बतौर राज्यपाल उनकी जिम्मेदारी केंद्रीय योजनाएं धरातल तक पहुंच रही हैं या नहीं, यह देखना भी है। बजट लाने के साथ अन्य मुद्दों को सुलझाने का काम भी रहता है। सभी राजनीतिक दलों से बातचीत कर सुझाव लेंगे और प्रदेश को आगे बढ़ाया जाएगा। परिवार पहचान पत्र योजना गेमचेंजर साबित होगी। गरीबी दूर करने में सहायता मिलेगी।
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हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि नियमों से चलकर संवैधानिक पद की जिम्मेदारियों को निभाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार छोटे विषयों में अध्यादेश लाने के बजाय विधेयक पारित कर मंजूरी के लिए भेजे। राज्यपाल ने 40 वर्ष के राजनीतिक और दो वर्ष के संवैधानिक अनुभवों को साझा करते हुए शनिवार को अपना विजन पेश किया। 

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कर्म को प्रधान बताते हुए साफगोई से उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त से जुड़े मामले में अभी कुछ दिन पहले सरकार अध्यादेश लाई थी, जिसे लौटाते हुए विधानसभा में विधेयक पारित कराने को कहा। सरकार ने उनकी बात मानी और संशोधन विधेयक पास कराकर मंजूरी के लिए भेजा। उन्होंने सरकार को अति महत्वपूर्ण विषयों में ही अध्यादेश लाने का सुझाव दिया है। साथ ही कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और बाहरी मजदूर उनकी मुख्य प्राथमिकताएं हैं।

मुख्यमंत्री व मंत्रियों से लगातार संवाद
राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल व मंत्री अहम मुद्दों व उपलब्धियों को लेकर लगातार संवाद कर रहे हैं। अनेक विषयों पर चर्चा की है। एक-दूसरे के ध्यान में चीजों को लाया है। हरियाणा हर क्षेत्र में उन्नति कर रहा है। लोग सादे व मेहनती हैं। यह प्रदेश उन्हें बहुत पसंद आया है। 15 जुलाई 2021 को उन्होंने प्रदेश के राज्यपाल का कार्यभार संभाला था। शनिवार को उन्हें हिमाचल व हरियाणा में इस पद पर सेवाएं देते हुए दो वर्ष पूरे हो गए।

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विवि में खाली पद भरेंगे, रेडक्रॉस-साकेत का होगा कायाकल्प: राज्यपाल

हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने राजभवन में मीडिया से रूबरू होने की नई परंपरा शुरू करते हुए बताया शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि में जैविक-प्राकृतिक खेती, कौशल विकास, लिंगानुपात व बाहरी मजदूरों के लिए काम करना उनकी मुख्य प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने शनिवार को कहा कि विश्वविद्यालयों में खाली पद भरेंगे और रेडक्रॉस व साकेत अस्पताल का कायाकल्प करेंगे।

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में खाली चल रहे पदों में से लगभग 80 फीसदी को सरकार से बातचीत कर चरणबद्घ तरीके से भरा जाएगा। बड़े स्तर पर पद खाली होने का मामला संज्ञान में आया है। नई शिक्षा नीति के तहत पद भरने में तीन-चार साल लगेंगे। विवि की कार्यप्रणाली भी सुधारेंगे। विवि में प्रवास किया जाएगा। दत्तात्रेय ने बताया कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिए जल्द बैठक की जाएगी। राज्यपाल के तौर पर जो भी चीजें ध्यान में आएंगी। 
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रेडक्रास में सामाजिक भागीदारी बढ़ेगी

राज्यपाल ने कहा कि रेडक्रास में सामाजिक भागीदारी बढ़ाई जाएगी। वालंटियर शामिल कराएंगे। सप्लाई चेन मजबूत करेंगे। कोविड में इसका महत्व मालूम हुआ है। जरूरतमंद लोगों की मदद की जाएगी। जल्द रेडक्रॉस की बैठक कर उसके नेटवर्क को बढ़ाया जाएगा। साकेत अस्पताल की सुविधाओं का सदुपयोग कराएंगे। दौरा कर चीजों को जाना है, अभी उसकी कार्यप्रणाली समझ रहे हैं।

‘संवाद से खत्म होगा किसान आंदोलन, शुरू हो वार्ता’
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि किसान आंदोलन संवाद से ही खत्म होगा। जल्दी वार्ता शुरू होनी चाहिए। उनका मानना है कि आंदोलन का जल्दी समाधान निकले। इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए, न ही वह किसी चीज पर राजनीति करेंगे। जनता की सेवा करना उनका ध्येय है।

उन्होंने अपने समकक्ष सत्यपाल मलिक के मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर दिए बयान पर कुछ भी बोलने से इनकार किया और नए कृषि कानूनों के साथ ही बातचीत की पैरवी की। बंडारू ने कहा कि सुधार किसी भी क्षेत्र में हों, उन पर आगे बढ़ना चाहिए। केंद्र सरकार किसानों से वार्ता के लिए तैयार है। लोकतंत्र का अर्थ ही संवाद होता है। संवाद से समाधान के मौके को गंवाना नहीं चाहिए। किसान कृषि कानूनों में सुधार को लेकर वार्ता शुरू करें।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री से समय-समय पर चर्चा होती रहती है। अधिकारी भी बात करते हैं। सभी को लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्वक तरीके से रखने का अधिकार है। आंदोलन में हिंसा व राजनीति का कोई स्थान नहीं। राज्य सरकार किसान हित में बेहतर काम कर रही है। अनेक बड़े फैसले किसानों की आय दोगुनी करने के संबंध में लिए हैं।  
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