चंडीगढ़। चंडीगढ़ के एसएसपी पद से पंजाब काडर के अफसर को हटाने के मामले में बुधवार को यूटी के प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने स्पष्ट कर दिया कि आईपीएस अधिकारी कुलदीप सिंह चहल को उनके खराब व्यवहार के कारण पंजाब वापस भेजा गया है। इस विवाद पर मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा मंगलवार को लिखे पत्र के जवाब में राज्यपाल ने एक पत्र जारी कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया और यह भी लिखा कि उन्होंने कुलदीप चहल को 30 नवंबर को ही साफ कर दिया था कि उन्हें पंजाब काडर में वापस जाना है।
राज्यपाल ने अपने पत्र में लिखा कि एसएसपी पद पर कुलदीप सिंह चहल के व्यवहार की शिकायतों की भरोसेमंद सूत्रों से जांच कराई गई। इसमें शिकायतें सही पाए जाने के बाद उन्हें समयपूर्व पद से हटाने का फैसला लिया गया। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री के पत्र लिखने पर भी सवाल उठाए हुए अपने जवाबी पत्र में लिखा- पत्र की सामग्री प्रदर्शित करती है कि उक्त पत्र लिखते समय तथ्यों का पता लगाने के लिए उचित सावधानी नहीं बरती गई है और इसे ऐसे ही भेज दिया गया है। अगर इस बात का ध्यान रखा जाता तो इस तरह का पत्र पहली बार में नहीं लिखा जा सकता था। राज्यपाल ने सलाह दी कि पूरे मामले पर ध्यान दिया जाना चाहिए था।
चहल को 30 नवंबर को ही सुना दिया था फैसला
राज्यपाल ने पत्र में लिखा कि उन्होंने चहल के बारे में 28 नवंबर को टेलीफोन पर मुख्य सचिव को जानकारी दी थी और एसएसपी के पद के लिए सक्षम अफसरों का पैनल भेजने को कहा था। राज्यपाल ने लिखा- ‘मैंने उन्हें यह भी बताया कि डीजीपी यूटी प्रवीर रंजन आपको तथ्यों से अवगत कराएंगे। इसके बाद प्रवीर रंजन 30 नवंबर को शाम 4.30 बजे मुख्य सचिव से मिले और मामले की पूरी जानकारी देते हुए मुख्य सचिव से पंजाब का पैनल भेजने का अनुरोध भी किया। 30 नवंबर को ही यूटी प्रशासन के सलाहकार ने भी मुख्य सचिव को फोन करके अफसरों का पैनल भेजने का अनुरोध किया।’
राज्यपाल ने आगे लिखा कि 30 नवंबर को शाम 5.30 बजे मुख्य सचिव ने उनसे मुलाकात की, जिसमें मुख्य सचिव को न सिर्फ चहल को पंजाब वापस भेजने की जानकारी दी गई बल्कि पैनल भेजने को भी कहा गया। उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने 30 नवंबर को आईपीएस अधिकारी कुलदीप चहल को बुलाकर उन्हें स्पष्ट रूप से कह दिया था कि उन्हें अपने पंजाब काडर में वापस जाना है।
पत्र लिखने से पहले विचार करना था : राज्यपाल
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नाम भेजे जवाबी खत में एसएसपी संबंधी पूरी स्थिति बताने के बाद यह भी लिखा- ‘चूंकि आप (मुख्यमंत्री) गुजरात के विधानसभा चुनाव के प्रचार में व्यस्त थे इसलिए आपसे संपर्क नहीं हो सका।’ राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से कहा- ‘आपने इस सिलसिले में पंजाब बनाम हरियाणा का अनावश्यक मुद्दा भी उठाया जो इस एडहॉक नियुक्ति के मामले में लागू नहीं होता। मैं आपके लिए कामना करता हूं कि मुझे पत्र लिखने से पहले आपको इन पहलुओं पर विचार करना चाहिए था।’