चंडीगढ़। पंजाब में विकास कार्यों को गति देने के लिए राज्य सरकार 2500 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद वित्त विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है और इस राशि का उपयोग विकास परियोजनाओं और पूंजीगत खर्चों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
वित्तीय वर्ष शुरू होने के बाद सरकार ने तीसरी बार कर्ज लेने की प्रक्रिया शुरू की है जिसका विपक्ष की तरफ से विरोध किया जा रहा है। सरकार ने मंगलवार को तीन अलग-अलग अधिसूचना जारी करके लोन लेने की प्रक्रिया शुरू की है जिसके तहत 1000, 700 और 800 करोड़ रुपये का लोन लिया जाना है।
वित्त विभाग की तरफ से जारी 1000 करोड़ के लोन की जारी अधिसूचना के अनुसार यह कर्ज खुले बाजार में नीलामी के जरिये उठाया जाएगा और इसे 18 साल में यानी 20 मई 2044 तक चुकाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार इस राशि का उपयोग विकास कार्यों के साथ पुराने कर्ज के ब्याज और अन्य वित्तीय देनदारियों के भुगतान में भी किया जाएगा। हालांकि राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि सरकार कर्ज घटाने के बजाय लगातार बढ़ा रही है और लोगों पर यह अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। पंजाब सरकार ने एक ही दिन में 2500 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की प्रक्रिया शुरू की है जबकि पहले ही सूबा कर्ज के बोझ में दबा हुआ है। सूबे को विकास की राह पर ले जाने की जगह वित्तीय संकट में धकेला जा रहा है।