चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की ओर से प्लॉट आवंटियों पर मनमाने ढंग से अतिरिक्त शुल्क लगाने को गैरकानूनी करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गमाडा बिना अनुमति के मूल अनुबंध की शर्तों में बदलाव नहीं कर सकता और न ही अतिरिक्त शुल्क वसूल सकता है।
जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने कहा कि गमाडा द्वारा लगाए गए ये नए शुल्क अनुचित और मनमाने हैं। यह संपत्ति के सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, इसलिए इन्हें अवैध घोषित किया जाता है। यह फैसला उन सैकड़ों याचिकाओं पर दिया गया, जिन्हें मूल आवंटियों और उनके ट्रांसफरी (प्लॉट खरीदने वाले) ने दायर किया था। याचिकाकर्ताओं ने गमाडा द्वारा इच्छा से लगाया गया प्लाॅट का चयन शुल्क और अन्य अतिरिक्त लागतों को चुनौती दी थी।
गमाडा ने तर्क दिया कि प्लॉट के बाद के खरीदारों को मूल भू-मालिकों से अलग माना जाना चाहिए और बढ़ती विकास लागत के कारण अतिरिक्त शुल्क अनिवार्य हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि प्लॉट ट्रांसफर की अनुमति थी। ट्रांसफर फीस के भुगतान के बाद ट्रांसफरी को भी वही अधिकार मिलते हैं, जो मूल आवंटी को मिले थे। कोर्ट ने कहा, मूल आवंटियों और उनके ट्रांसफरी के बीच कोई अंतर नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने गमाडा को आदेश दिया कि यदि किसी याचिकाकर्ता ने अतिरिक्त शुल्क का भुगतान किया है, तो दो महीने के भीतर 6 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ उनकी राशि लौटाई जाए। साथ ही, गमाडा को याचिकाकर्ताओं को दो हफ्तों के भीतर बिना किसी बाधा के उनके प्लॉट का कब्जा सौंपने का निर्देश दिया गया है।