प्रवासियों पर सबसे ज्यादा असर, महंगे विकल्प अपनाने को मजबूर सरकार के दावों पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
रामगढ़। क्षेत्र में गैस की भारी किल्लत के चलते उपभोक्ताओं को खाना बनाने तक के लाले पड़ गए हैं। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ ढाबा और दुकानदार भी परेशान हैं, जबकि प्रवासी लोगों की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।
लंबे समय से गैस की कमी के कारण लोग दर-दर भटकने को मजबूर हैं। हालांकि सरकार गैस आपूर्ति सुचारु होने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं।
गैस न मिलने के कारण लोग अब मजबूरी में बिजली से चलने वाले उपकरण खरीद रहे हैं, जिनकी कीमत करीब दो हजार से आठ हजार रुपये तक है। इससे बिजली बिल बढ़ने की आशंका भी लोगों को सता रही है। वहीं, जिन दुकानदारों के पास डीजल भट्टी की सुविधा नहीं है, उन्हें अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
प्रवासी मजदूरों की स्थिति सबसे अधिक खराब है, क्योंकि वे न तो डीजल और न ही लकड़ी का चूल्हा जला सकते हैं। ऐसे में कई बार उन्हें भूखे रहने तक की नौबत आ रही है। दूसरी ओर, गैस सिलेंडर की कमी के चलते लोग मजबूरी में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को विवश हैं।
आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही
दुकानदार गुरचरण सिंह बब्लू ने बताया कि गैस सिलिंडर न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और उन्हें डीजल भट्टी पर काम करना पड़ रहा है। रमजान, निवासी रामगढ़ ने कहाेे कि पिछले कुछ दिनों से गैस की भारी कमी है, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने सरकार से जल्द समाधान की मांग की। साबर अली दबकौरी ने कहा कि गैस के बिना खाना बनाना संभव नहीं है और लोगों के पास कोई अन्य विकल्प भी नहीं है। सरकार को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए।