अमेरिकी महिला से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में वीडियो कांफ्रेंसिंग से फ्रांसीसी डॉक्टर इंडियन एंबेसी में पेश नहीं हुए, क्योंकि समन नहीं दिए जा सके।
अदालत ने इंडियन एंबेसी के माध्यम से बयान दर्ज कराने के लिए उन्हें नए सिरे से समन जारी किए गए थे, लेकिन उन्हें समन नहीं दिए जा सके। कोर्ट पहले भी दूतावास के माध्यम से उन्हें समन जारी कर चुकी है, लेकिन हर बार अदालत को सूचित किया जाता है कि उन्हें समन नहीं दिए जा सके।
अदालत ने होम सेक्रेटरी के माध्यम से चंडीगढ़ प्रशासन को दिशा निर्देश जारी किए थे कि फ्रांस में इंडियन एंबेसी से बयान रिकॉर्ड करने के लिए उचित चैनल की व्यवस्था की जाए। फ्रांसीसी डॉक्टर का बयान इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे एक ऐसे गवाह हैं जिन्होंने देश से जाने के बाद पीड़िता का मेडिकल करवाया था।
अदालत ने 16 जुलाई 2019 को उन्हें पहली बार समन भेजा था और गृह सचिव के माध्यम से चंडीगढ़ प्रशासन को दूतावास के साथ उचित चैनल के माध्यम से आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। बाद में अदालत ने 23 अगस्त 2019, 17 सितंबर और 11 दिसंबर को दोबारा उन्हें समन भेजे थे।
यह मामला अप्रैल 2015 का है। 24 वर्षीय एक अमेरिकी महिला ने ई-मेल के जरिए आईजी को सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पीड़िता के मुताबिक वह भारत घूमने आई थी। हरिद्वार-ऋषिकेश घूमने के बाद वह चंडीगढ़ घूमना चाहती थी। चंडीगढ़ के बाद उसे फ्रांस जाना था।
पासपोर्ट एक्सपायर होने में भी सिर्फ चार दिन बचे थे। 17 अप्रैल 2015 की रात उसने होटल जाने के लिए सेक्टर 17 बस स्टैंड से ऑटो लिया। ऑटो चालक होटल दिलवाने के नाम पर उसे अपने घर ले गया, जहां उसका एक और साथी पहले से मौजूद था। दोनों ने सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया। उसके बाद पीड़िता फ्रांस पहुंची और वहां से ई-मेल के जरिए पुलिस को शिकायत दी।
शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। करीब दो साल बाद एक आरोपी बलदेव कुमार को लुधियाना से पकड़ा गया, जबकि दूसरे आरोपी को नहीं पकड़ा जा सका। उसके बाद बयान और आरोपी की शिनाख्त परेड (टीआईपी) को लेकर पेच फंस गया, लेकिन पीड़िता के अमेरिका वापस जाने के कारण उसके बयान नहीं हो सके, जिससे कार्रवाई रुकी हुई थी।
हाईकोर्ट के दूतावासों के माध्यम से बयान दर्ज करने के दिशा निर्देश के बाद ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पीड़िता के बयान दर्ज कराए गए।