पंचकूला। सेक्टर-22 आईटी पार्क की डीएचए स्क्वेयर बिल्डिंग नंबर-9 में नौ सरकारी दफ्तरों के बीच हाईटेक ऑफिस में साइबर ठगी का खेल चल रहा था। इस बिल्डिंग में आईएएस, एचसीएस समेत कई बड़े अधिकारी बैठते हैं। यहां पुलिसकर्मियों का भी आना-जाना लगा रहता है। हैरानी की बात यह है कि हरियाणा सरकार के इतने बड़े दफ्तर में अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद करीब आठ महीने से विदेशी नागरिकों को ठगने का खेल चल रहा था, इसकी भनक किसी को नहीं थी।
यहां हरियाणा सरकार के राज्य विधि आयोग, हरियाणा गौ-सेवा विधि आयोग का दफ्तर भी है। वहीं, बिल्डिंग की ऊपरी मंजिलों पर खनन एवं भू विभाग, हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण, मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के महानिदेशक, हरियाणा नर्सिंग एंड नर्स मिड वाइफ काउंसिल, हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड, रेशनेलाइजेशन कमीशन हरियाणा और हरियाणा कैश कला एवं कौशल विकास बोर्ड के दफ्तर शामिल हैं। इसके अलावा जिस अन्य बिल्डिंग से दो फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ हुआ है, वहां कोई सरकारी दफ्तर मौजूद नहीं है। सीआईए सेक्टर-26 की टीम ने मुख्य आरोपी मुंबई के महेश सिट्टे को अदालत में पेश किया जहां से उसे 8 दिन रिमांड मिला है। वहीं, चंडीमंदिर थाना पुलिस ने महाराष्ट्र के डेविड डेनियल और मनीष को अदालत में पेश किया जहां से तीन दिन का पुलिस रिमांड मिला है।
संचालक सहित चार कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर
फर्जी काल सेंटर के संचालक सहित चार कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इनमें कॉल सेंटर संचालक आरिफ शेख (मुंबई), अकिल शेख (पुणे), हार्दिक व कौशिक नामक व्यक्ति शामिल हैं। पुलिस ने एफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने षड़्यंत्र के तहत बिना किसी लाइसेंस और मंजूरी के फर्जी कॉल सेंटर चलाकर यूएसए के नागरिकों को उनकी विभिन्न समस्या को दूर करने के लिए तकनीकी सहायता के नाम पर गुमराह कर डॉल बीटीसी बैलिड गिफ्ट कार्ड ऐंठ कर ठगी की। इनके खिलाफ बीएनएस की धारा 318 (4), 61 (2) व आईटी एक्ट की धारा 66, 66 सी, 66 ई और 75 के तहत चंडीमंदिर थाने में केस दर्ज किया गया है। वहीं, साइबर थाना पुलिस भी कार्रवाई में जुटी है।
पुलिस कमिश्नर बोले- किसी पुलिसकर्मी का नाम आया तो होगी सख्त कार्रवाई
पुलिस कमिश्नर शिवास कबिराज ने बताया कि इन फर्जी कॉल सेंटरों के संचालन के पीछे अगर किसी पुलिसकर्मी का भी नाम सामने आता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि साइबर क्राइम समेत पुलिस की विभिन्न टीमें फरार गैंग सदस्यों की तलाश में जुटी हुई हैं। वहीं, व्यापक स्तर पर की गई पैसे की लेन-देन का भी पता लगाया जा रहा है और पुलिस ने आरोपियों के बैंक खाते भी फ्रीज किए हैं।
जांच में यह आया सामने
पुलिस जांच में सामने आया है कि हिरासत में लिए गए कर्मचारियों में ज्यादातर को साइबर ठगी के संबंध में जानकारी नहीं थी। वह सिर्फ नौकरी कर रहे थे।
100 डॉलर से 500 डॉलर तक की ठगी को देते थे अंजाम
पुलिस के मिली जानकारी के मुताबिक डीएचएल स्क्वेयर्स के फर्जी कॉल सेंटर में विदेशी नागरिकों स्पेक्ट्रम, ओटीटी, एक्सफीनीटी, सेंचुरी लिंक की कस्टमर सर्विस देने व उसे ठीक करने के नाम पर अलग-अलग समस्या बताकर कॉल वैंडर के माध्यम से डायल पर कॉल प्राप्त कर गुमराह करते थे। इसके बाद तकनीकी सहायता देने के नाम पर विदेशी नागरिकों के साथ 100 डॉ़लर से 500 डॉलर की ठगी करते थे। इन कॉल सेंटर में पुलिस को 11 लड़के और दो लड़किया हैडफोन के माध्यम से अंग्रेजी भाषा में बातचीत करते नजर आए। इनमें मुंबई, मणिपुर, पुणे और पंजाब से शामिल थे। मुंबई निवासी एक कर्मी डेनियल ने बताया कि वह सभी हार्दिक के कहने पर नौकरी कर रहे थे और हार्दिक उन्हें कैश में सैलरी देता था।
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कॉल सेंटर कर्मी रात तीन बजे तक हो जाते थे चंपत
डीएचएल स्क्वेयर स्थित फर्जी कॉल सेंटर के कर्मी कैब आदि से शाम पांच से साढ़े 6 बजे तक कॉल सेंटर पहुंचते थे। इसके बाद रात करीब तीन बजे तक काम खत्म कर निकल जाते थे। यह जानकारी बिल्डिंग के प्रथम तल पर एक दफ्तर के कर्मचारी ने दी।
आगे क्या...
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईटी पार्क में जितने भी कस्टमर केयर से संबंधित कॉल सेंटर चल रहे हैं। उन सभी कॉल सेंटरों की जानकारी खंगाली जा रही है। पुलिस पता लगा रही है कि इनमें से कोई और कॉल सेंटर फर्जी तो नहीं। एक अनुुमान के मुताबिक सेक्टर-22 आईटी पार्क में करीब 18 बिल्डिंग हैं जिनमें विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी दफ्तर बने हुए हैं।
कोट
फिलहाल एक आरोपी को अदालत में पेश कर आठ दिन का रिमांड लिया गया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। इस मामले में जल्द बड़ा खुलासा होने की संभावना है। - मनप्रीत सिंह सूदन, डीसीपी क्राइम