संवाद न्यूज एजेंसी
बठिंडा। आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का ठेका दिलवाने के नाम पर एक व्यक्ति से 30 लाख रुपये की ठगी करने वाले तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले में थाना सिविल लाइन पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
चार जून 2025 को एसएसपी के पास दी शिकायत में दीपक बांसल निवासी अमरीक सिंह रोड बठिंडा ने बताया कि आरोपी अमित बसंल, कांता बांसल और चार्टर्ड अकाउंटेंट नरिंदर गर्ग ने मिलकर करीब 30 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है। इसमें आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के लिए टेंडर प्राप्त करने के लिए नकली और जाली नेटवर्क सर्टिफिकेट तैयार करने के साथ उसका उपयोग किया गया।
यह टेंडर पंजाब सरकार ने बठिंडा में आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन खोलने के लिए जारी किया था। इसमें आरोपी अमित बांसल शिकायतकर्ता दीपक कुमार और हरीश कुमार को पहले से जानता थे। उसने प्रलोभन दिया कि अगर वह टेंडर भर देगा, तो उसे बहुत आर्थिक लाभ होगा। इस दौरान शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया कि उन्हें टेंडर भरने और काम के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो आरोपी ने कहा कि वह सब कुछ खुद करेंगे, लेकिन इसके लिए हमें उसकी मां के नाम पर परिवहन विभाग को 5 लाख रुपये सरकारी शुल्क और 25 लाख रुपये बैंक गारंटी के रूप में देने होंगे। उसने आश्वासन दिया कि कुछ भी गलत नहीं होगा और हमें इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह अपनी मां की सहमति से उनके नाम पर यह काम करेगा। यह तय हुआ कि अगर टेंडर मिल जाता है, तो उसे आय का 5 फीसदी दिया जाएगा और बाकी हिस्सा हम दोनों के बीच बांट दिया जाएगा, क्योंकि इस काम की लागत के लिए आरोपी जिम्मेदार थे। किसी कारण से काम नहीं करने पर विभाग के निर्देशानुसार इस कार्य को किसी अन्य को सबलेट कर सकते हैं।
शिकायतकर्ता ने बताया कि जब हमने इस संबंध में तीनों आरोपियों से बात की ताे उन्होंने हमें पैसा देने पर लाभ का आश्वासन दिया। टेंडर आरोपी अमित बांसल की मां के नाम पर फर्म बांसल सेल्स काॅरपोरेशन को आवंटित हो गया। इसमें आरोपी अपनी मां के साथ मिलीभगत करके हमें धोखा देने की नीयत से अपने वादे से मुकर गए और हमारे साथ किसी भी तरह का साझेदारी समझौता करने से इन्कार कर दिया। आरोपियों ने अपने रिश्तेदार नरिंदर कुमार गर्ग, जोकि पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है के साथ मिलीभगत करके 3 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी नेटवर्क सर्टिफिकेट तैयार किया और बैंक स्लिप में गलत यूडीआईएन नंबर डालकर परिवहन विभाग, पंजाब सरकार को जमा कर दिया है।
इस प्रकार सभी आरोपियों ने आपस में मिलीभगत करके शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी की है। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है व आरेापियों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है।