मोरनी। क्षेत्र के किसान इन दिनों तकनीकी दिक्कतों के चलते प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। भारत सरकार और हरियाणा सरकार की ओर से संयुक्त रूप से संचालित इस योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसलों के नुकसान से बचाना और उनकी आय में सुधार करना है। लेकिन अधिकारियों की लेट-लतीफी और पोर्टल पर तकनीकी खामी के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मोरनी के किसानों ने बताया कि पहले उनकी जमीन का पंजीकरण बीघा के आधार पर किया जाता था, लेकिन हाल ही में पोर्टल पर इसे किल्ला में बदल दिया गया है। इससे किसानों के लिए पोर्टल पर अपनी फसलों का बीमा कराना मुश्किल हो गया है। हरियाणा के निचले इलाकों में राजस्व रिकॉर्ड किल्ला के हिसाब से दर्ज होता है, जबकि मोरनी में जमीन की माप के लिए बीघा का उपयोग होता है। इसी असमानता के कारण किसानों का डेटा पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पा रहा।
असमानता को खत्म करने की मांग
किसानों ने बताया कि जो बीमा कंपनी इस योजना को राज्य में संचालित करती है उसकी वेबसाइट पर तकनीकी समस्या के कारण रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। पोर्टल पर यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक समाधान नहीं किया गया है। 31 दिसंबर को रजिस्ट्रेशन करने का आखिरी तारीख है। किसानों ने सरकार से अनुरोध किया है कि तकनीकी खामी को जल्द से जल्द दूर किया जाए और बीघा और किला जैसे मानकों की असमानता को खत्म किया जाए। इसके साथ ही पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने की जरूरत है,ताकि सभी किसान इस योजना का लाभ उठा सकें।