ईडी ने चार दिन की रिमांड पर लिया, मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी धन के गबन की जांच तेज
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 645 करोड़ रुपये के बहुचर्चित आईडीएफसी बैंक घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा विकास एवं पंचायत विभाग के तत्कालीन अधीक्षक नरेश कुमार को गिरफ्तार किया है। ईडी ने नरेश कुमार को 10 जून को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया।
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन तथा चंडीगढ़ और पंचकूला के दो निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में संचालित खातों से करीब 645 करोड़ रुपये की सरकारी राशि का गबन किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार इस घोटाले में विक्रम वाधवा मुख्य आरोपियों में शामिल है, जिसने रिभव ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों और कुछ सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी धन के गबन की साजिश रची।
ईडी के मुताबिक, नरेश कुमार को कथित तौर पर स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नामक शेल कंपनी के माध्यम से सीधे धनराशि प्राप्त हुई। जांच में सामने आया है कि वह केवल धन प्राप्त करने तक सीमित नहीं था, बल्कि धन के डायवर्जन, लेयरिंग और अपराध से अर्जित रकम को छिपाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
खातों में पहुंचे 1.20 करोड़ रुपये
एजेंसी का दावा है कि नरेश कुमार और उसके परिवार के बैंक खातों में करीब 1.20 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि पहुंची। इसके अलावा गबन की गई रकम से उत्पन्न बड़ी मात्रा में नकदी भी उसे उपलब्ध कराई गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई शेल कंपनियों के जरिए सरकारी खातों से धन निकाला गया। इनमें कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आरएस ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाओं के नाम शामिल हैं। ईडी के अनुसार, इन कंपनियों के खातों में सरकारी धन ट्रांसफर किया गया और बाद में विभिन्न बैंक खातों के जरिए रकम को इधर-उधर भेजकर उसके स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया। एजेंसी ने दावा किया है कि इन शेल कंपनियों से सैकड़ों करोड़ रुपये विभिन्न ज्वैलर्स के खातों में भेजे गए, जहां बैंकिंग लेनदेन के बदले नकदी उपलब्ध कराई गई। इसके बाद यह नकदी विभिन्न सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाई गई, जिनमें नरेश कुमार का नाम भी शामिल है।
आरोपी चार दिन की रिमांड पर
ईडी ने नरेश कुमार को विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया, जहां से अदालत ने उसे 14 जून तक चार दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया। इससे पहले इसी मामले में रिभव ऋषि, अभय कुमार और विक्रम वाधवा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। ईडी ने बताया कि मामले की जांच जारी है। धन के पूरे नेटवर्क, अन्य लाभार्थियों तथा घोटाले की रकम से अर्जित संपत्तियों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह मामला हाल के वर्षों में हरियाणा और चंडीगढ़ क्षेत्र से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है।